टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की सेमीफाइनल की राह हुई मुश्किल, बड़े रन रेट से जीतने होंगे दोनों मैच
- केवल जीत नहीं होगी काफी, दूसरी टीमों पर भी होगी निर्भरता, दक्षिण अफ्रीका पर टिकी निगाहें
नई दिल्ली। टी-20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 चरण में भारतीय टीम की शुरुआत निराशाजनक रही है। अहमदाबाद में खेले गए पहले मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 76 रन के बड़े अंतर से पराजित कर दिया। इस हार ने न केवल अंक तालिका में भारत को नीचे पहुंचा दिया, बल्कि शुद्ध रन दर पर भी गहरा असर डाला है। अब सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए टीम इंडिया को शेष दोनों मुकाबलों में सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत दर्ज करनी होगी।
सुपर-8 का समीकरण
सुपर-8 चरण में दो समूह बनाए गए हैं और प्रत्येक समूह में चार-चार टीमें शामिल हैं। हर समूह से शीर्ष दो टीमें अंतिम चार में जगह बनाएंगी। समूह-1 में दक्षिण अफ्रीका दो अंकों और प्लस 3.800 की प्रभावशाली शुद्ध रन दर के साथ शीर्ष पर है। वहीं भारत एक मैच हारने के बाद शून्य अंक और माइनस 3.800 की शुद्ध रन दर के साथ सबसे नीचे खिसक गया है। माइनस 3.800 की शुद्ध रन दर का अर्थ है कि भारत को आगामी मुकाबलों में बड़ा अंतर बनाना होगा, ताकि वह अपनी स्थिति सुधार सके। हालांकि केवल दो जीत भी भारत के लिए सेमीफाइनल की गारंटी नहीं हैं, क्योंकि स्थिति अन्य टीमों के परिणामों पर भी निर्भर करेगी।
अब बचे दो मुकाबले
भारत को अपने अगले मुकाबले जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलने हैं। जिम्बाब्वे से मुकाबला 26 फरवरी को चेन्नई में होगा, जबकि वेस्टइंडीज से एक मार्च को कोलकाता में भिड़ंत तय है। यदि भारत दोनों मुकाबले जीत लेता है तो उसके कुल चार अंक हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में यदि दक्षिण अफ्रीका अपने शेष दोनों मैच जीत लेता है तो वह छह अंकों के साथ शीर्ष पर रहेगा और सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा। तब भारत चार अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रह सकता है, क्योंकि बाकी दोनों टीमें अधिकतम दो-दो अंकों तक सीमित रहेंगी। यह भारत के लिए सबसे आसान और स्पष्ट समीकरण है।
पेच यहीं से शुरू होता है
स्थिति तब जटिल हो जाएगी, जब दक्षिण अफ्रीका अपने दो में से केवल एक मुकाबला जीत पाए और वेस्टइंडीज या जिम्बाब्वे में से कोई एक टीम उसे हरा दे। ऐसे में तीन टीमें चार-चार अंकों पर पहुंच सकती हैं। उस स्थिति में निर्णय शुद्ध रन दर के आधार पर होगा। भारत की मौजूदा शुद्ध रन दर काफी कमजोर है। इसलिए टीम को न केवल जीत, बल्कि बड़े अंतर से जीत की जरूरत होगी। 76 रन की हार ने भारत की गणना को कठिन बना दिया है। अब हर रन और हर ओवर का महत्व बढ़ गया है।
दक्षिण अफ्रीका पर टिकी निगाहें
क्रिकेट जगत में दक्षिण अफ्रीका को कई बार बड़े टूर्नामेंटों में दबाव में चूकने वाली टीम माना जाता रहा है। यदि वह अपने शेष दोनों मुकाबले हार जाती है, तो स्थिति एकदम बदल सकती है। ऐसी स्थिति में जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के दो-दो अंक होंगे, जबकि दक्षिण अफ्रीका भी दो अंकों पर रह जाएगी। अगर भारत अपने दोनों मुकाबले जीत लेता है, तो उसके चार अंक हो जाएंगे। फिर जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के बीच होने वाला मुकाबला निर्णायक साबित होगा। जो टीम वह मैच जीतेगी, वह भी चार अंकों के साथ सेमीफाइनल में जगह बना सकती है। ऐसे में भारत का स्थान मजबूत हो सकता है।
एक जीत से बढ़ेगी मुश्किल
यदि भारत केवल एक ही मुकाबला जीत पाता है, तो हालात और अधिक उलझ सकते हैं। तब उसे दक्षिण अफ्रीका की दोनों जीत की उम्मीद करनी होगी और साथ ही यह भी देखना होगा कि उसकी जीत वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे में से किसके खिलाफ आती है। ऐसी स्थिति में तीन टीमों के दो-दो अंक हो सकते हैं और फिर फैसला शुद्ध रन दर से होगा। इस परिस्थिति में भारत का भविष्य पूरी तरह अन्य टीमों के प्रदर्शन और अपने बड़े अंतर की जीत पर निर्भर करेगा। छोटी जीत से काम नहीं चलेगा। बल्लेबाजों को बड़े स्कोर खड़े करने होंगे और गेंदबाजों को विपक्षी टीम को कम स्कोर पर रोकना होगा।
अब नहीं है चूक की गुंजाइश
सुपर-8 के पहले ही मुकाबले में मिली 76 रन की हार ने भारतीय अभियान को मुश्किल बना दिया है। हालांकि अभी भी वापसी का मौका है, लेकिन कोई भी चूक महंगी साबित हो सकती है। टीम को रणनीतिक रूप से आक्रामक खेल दिखाना होगा और हर मुकाबले को करो या मरो की तरह लेना होगा। समीकरण साफ है कि दोनों मैच जीतिए और वह भी बड़े अंतर से। तभी शुद्ध रन दर सुधरेगी और सेमीफाइनल की राह खुलेगी। अन्यथा भारत को दूसरी टीमों के परिणामों पर निर्भर रहना पड़ेगा। टीम इंडिया के सामने चुनौती बड़ी है, लेकिन क्रिकेट में असंभव कुछ भी नहीं। अब देखना यह है कि चेन्नई और कोलकाता में भारतीय खिलाड़ी किस तरह का प्रदर्शन करते हैं और क्या वे अंतिम चार में जगह बनाने की उम्मीदों को जिंदा रख पाते हैं या नहीं।


