सहरसा में शादी का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, फर्जी मैरिज ब्यूरो पर साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

  • सोशल मीडिया के जरिए युवकों को फंसाकर वसूली, तीन युवतियां हिरासत में
  • मुख्य सरगना फरार, कॉल सेंटर के माध्यम से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क

सहरसा। बिहार के सहरसा जिले में साइबर पुलिस ने एक संगठित ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो युवकों को शादी का झांसा देकर उनसे पैसे ऐंठ रहा था। सदर थाना क्षेत्र के पॉलिटेक्निक ढाला के पास चल रहे एक फर्जी विवाह ब्यूरो पर छापेमारी कर पुलिस ने तीन युवतियों को हिरासत में लिया है। यह गिरोह “मैरिज लाइन डॉट कॉम” नाम से एक नकली कॉल केंद्र संचालित कर रहा था, जिसके जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया मंचों जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी पहचान बनाकर सक्रिय था। इन नकली प्रोफाइलों के माध्यम से आकर्षक तस्वीरें और जानकारी साझा कर अविवाहित युवकों को अपने जाल में फंसाया जाता था। इसके बाद उनसे संपर्क कर शादी का प्रस्ताव दिया जाता और धीरे-धीरे विश्वास कायम किया जाता था। साइबर उपाधीक्षक अजीत कुमार के अनुसार, गिरोह के सदस्य पहले युवकों को सुंदर युवतियों की तस्वीरें दिखाकर भरोसा जीतते थे। इसके बाद पंजीकरण और संपर्क सेवा के नाम पर उनसे शुरुआती तौर पर 1500 रुपये वसूले जाते थे। एक बार जब व्यक्ति उनके झांसे में आ जाता, तो अलग-अलग बहानों से लगातार अधिक रकम की मांग की जाती थी। इस तरह यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से ठगी को अंजाम देता था। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का मुख्य सरगना रंजन कुमार है, जो सुपौल जिले का निवासी है। वह सहरसा में किराए के मकान में रहकर इस पूरे रैकेट का संचालन कर रहा था। उसने कॉल केंद्र की तर्ज पर कई युवतियों को नौकरी पर रखा था, जो अलग-अलग समय पर काम करते हुए फोन कॉल और संदेशों के माध्यम से लोगों को फंसाती थीं। छापेमारी के दौरान हिरासत में ली गई तीनों युवतियों में दो सहरसा और एक पूर्णिया जिले की रहने वाली बताई गई हैं। पूछताछ में उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये वेतन दिया जाता था और उनका काम केवल फोन कॉल करना और बातचीत करना था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पूरे ठगी नेटवर्क की गहराई के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी रंजन कुमार लोगों को भ्रमित करने के लिए उत्तर प्रदेश की एक सामूहिक विवाह संस्था के नाम का भी दुरुपयोग करता था। इससे पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि यह एक वैध और भरोसेमंद संस्था है। सोमवार देर रात की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने कुल 11 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया है। हालांकि, मुख्य आरोपी फिलहाल फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस अब इस पूरे साइबर ठगी नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। बैंक खातों, लेन-देन और कॉल विवरणों की पड़ताल की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने लोग इस गिरोह के शिकार बने हैं और कितनी रकम की ठगी की गई है। पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर तुरंत विश्वास न करें और किसी भी प्रकार के भुगतान से पहले पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें। उन्होंने यह भी कहा कि शादी जैसे संवेदनशील विषय पर किसी अनजान व्यक्ति या संस्था के झांसे में आना गंभीर आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही इस प्रकार की ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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