August 13, 2026

हंगामे के बीच संसद का मानसून सत्र खत्म, लोकसभा में 16 और राज्यसभा में 31 प्रतिशत ही कामकाज

  • विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध के कारण प्रश्नकाल और शून्यकाल प्रभावित, कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के हुए पारित
  • वंदे मातरम् के गायन के साथ दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, कई अहम विधेयक लंबित

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र बुधवार को विपक्ष और सरकार के बीच लगातार जारी गतिरोध और हंगामे के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। 20 जुलाई से शुरू हुआ सत्र निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त को समाप्त होना था। पूरे सत्र के दौरान कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने रहे, जिसका सीधा असर सदन के कामकाज पर पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा में निर्धारित कामकाज का करीब 16 प्रतिशत और राज्यसभा में लगभग 31 प्रतिशत ही हो सका।
वंदे मातरम् के साथ स्थगित हुई लोकसभा की कार्यवाही
लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। लोकसभा अध्यक्ष ने आसन संभालते ही सदस्यों से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान में खड़े होने का आग्रह किया। आमतौर पर सत्र के अंतिम दिन राष्ट्रगीत से पहले लोकसभा अध्यक्ष सदन की उत्पादकता, कामकाज और उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। राष्ट्रगीत के गायन के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता और सांसद सदन में मौजूद थे। राज्यसभा की कार्यवाही भी हंगामे के बीच चली और करीब एक घंटे की चर्चा के बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
दो प्रमुख मुद्दों पर सरकार को घेरता रहा विपक्ष
मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष ने दो प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया। पहला मुद्दा दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा था। विपक्ष ने पुलिस के लाठीचार्ज और कथित छर्रे वाली बंदूक के इस्तेमाल को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग की। विपक्षी दलों ने इस मामले में गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई। दूसरा बड़ा मुद्दा अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का रहा। विपक्ष ने इस मामले में भी सरकार से जवाब मांगा। दोनों मुद्दों को लेकर सदन में लगातार नारेबाजी और हंगामा होता रहा। इसके कारण कई बार लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
प्रश्नकाल और शून्यकाल भी रहे प्रभावित
लगातार व्यवधान का असर संसद की नियमित कार्यवाही पर पड़ा। कई दिनों में प्रश्नकाल और शून्यकाल सुचारू रूप से नहीं चल सके। विपक्ष का आरोप रहा कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है और जवाबदेही से पीछे हट रही है। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि वह सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। सत्र के दौरान कई घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गए। इससे विधायी कामकाज और व्यापक संसदीय बहस प्रभावित हुई। हालांकि, कम समय के बावजूद सरकार ने बहुमत के आधार पर कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए।
हंगामे के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित
सत्र के दौरान कागज लीक रोकथाम विधेयक, कराधान संशोधन विधेयक, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम संशोधन विधेयक और अधिकरण सुधार विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इनमें से कई विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के ध्वनिमत से पारित हुए। वहीं, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में संशोधन से संबंधित विधेयक और परिसीमन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव लंबित रह गए। विपक्ष ने इन विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए।
गतिरोध खत्म करने की कोशिश रही नाकाम
सत्र के अंतिम दिन से एक दिन पहले गृह मंत्री अमित शाह की ओर से चर्चा की पेशकश की गई थी। हालांकि, सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी। अंतिम दिन भी दोनों सदनों में हंगामा जारी रहा और अंततः कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस तरह संसद का मानसून सत्र विधायी कामकाज और राजनीतिक टकराव, दोनों के लिए चर्चा में रहा। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में सफल रही, लेकिन लगातार व्यवधान के कारण व्यापक संसदीय बहस और सरकार की जवाबदेही से जुड़े कई मुद्दों पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो सकी। सत्र के समापन के साथ अब इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच टकराव संसद के बाहर भी जारी रहने के संकेत हैं।

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