मणिपुर हिंसा का गहरा असर, 58 हजार से अधिक लोग विस्थापित, सैकड़ों की मौत
- सरकार के आंकड़ों में सामने आई तबाही, हजारों घर नष्ट, राहत शिविरों में रह रहे लोग
- विधायक वुंगजागिन वाल्टे की मौत पर न्याय की मांग तेज, 13 घंटे का पूर्ण बंद
मणिपुर। राज्य में मई 2023 से भड़की जातीय हिंसा के प्रभाव अब भी गहरे रूप में दिखाई दे रहे हैं। राज्य सरकार के गृह विभाग द्वारा सूचना के अधिकार कानून के तहत दी गई जानकारी के अनुसार, इस हिंसा के कारण अब तक 58,821 लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। यह आंकड़े 3 मई 2023 से 30 मार्च 2026 तक की अवधि को दर्शाते हैं, जो इस संकट की गंभीरता को स्पष्ट करते हैं। गृह विभाग के अनुसार हिंसा से जुड़ी घटनाओं में अब तक 217 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि प्रदान की गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। इस दौरान राज्य में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर होना पड़ा है। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, 10 मार्च 2026 तक राज्य में कुल 174 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में विस्थापित लोगों को अस्थायी रूप से रहने, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि, लंबे समय तक शिविरों में रहने के कारण लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार ने कदम उठाते हुए मणिपुर पुलिस आवास निगम लिमिटेड के माध्यम से 3,000 पूर्व-निर्मित मकानों का निर्माण कराया है। इन मकानों के जरिए प्रभावित परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद अभी भी बड़ी संख्या में लोग पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हिंसा के कारण संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार 7,894 स्थायी घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 2,646 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इससे हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है और उनके सामने जीवन को फिर से सामान्य बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इस बीच कांग्रेस नेता हरेश्वर गोस्वामी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस जानकारी को प्राप्त करने में उन्हें सात महीने का समय लगा। उन्होंने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए सरकार से त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। दूसरी ओर, चुराचांदपुर जिले में भारतीय जनता पार्टी के विधायक वुंगजागिन वाल्टे की मौत को लेकर भी लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। उनकी मौत के विरोध में बुधवार को 13 घंटे का पूर्ण बंद आयोजित किया गया। यह बंद जोमी समूहों द्वारा बुलाया गया था, जिसे कुकी और हमार संगठनों का भी समर्थन मिला। सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक चले इस बंद के दौरान बाजार, स्कूल, कार्यालय और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप रहे। प्रमुख मार्गों पर सन्नाटा पसरा रहा और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। हालांकि बंद के दौरान शांति बनी रही और केवल एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को ही अनुमति दी गई जोमी समन्वय समिति के अनुसार विधायक वाल्टे की मौत को 60 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इस मामले में कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है। वाल्टे मई 2023 में हुई हिंसा के दौरान भीड़ के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में 20 फरवरी 2026 को गुरुग्राम के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। आयोजकों ने चेतावनी दी है कि जब तक इस मामले में न्याय नहीं मिलता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। इससे राज्य में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। मणिपुर में जारी हिंसा और उसके प्रभावों ने राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विस्थापन, जनहानि और संपत्ति के नुकसान के साथ-साथ न्याय की मांग को लेकर बढ़ता आक्रोश यह संकेत देता है कि स्थिति को सामान्य करने के लिए व्यापक और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।


