हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच भारतीय नौसेना सतर्क, व्यापारिक जहाजों के लिए नई सलाह जारी

  • ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की फायरिंग के बाद सात युद्धपोत तैनात, जहाजों की आवाजाही पर निगरानी
  • लारक द्वीप से दूर रहने का निर्देश, कई भारतीय जहाज अब भी फारस की खाड़ी में प्रतीक्षा में

नई दिल्ली। हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना के बाद भारतीय नौसेना ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए नई सलाह जारी करते हुए सुरक्षा संबंधी कड़े निर्देश दिए हैं। साथ ही भारतीय हितों की रक्षा के लिए सात युद्धपोतों को रणनीतिक स्थानों पर तैनात कर दिया गया है। नौसेना द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी भारतीय जहाज लारक द्वीप के आसपास न जाए। जहाजों को सलाह दी गई है कि वे फारस की खाड़ी में सुरक्षित स्थानों पर ही रुकें और केवल नौसेना की अनुमति मिलने के बाद ही आगे बढ़ें। यह कदम जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। दरअसल, 18 अप्रैल 2026 को दो भारतीय व्यापारिक जहाज ‘जग अर्णव’ और ‘सन्मार हेराल्ड’ जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने का प्रयास कर रहे थे, तभी ईरानी गार्ड्स ने उन पर गोलियां चला दीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों जहाजों को तुरंत वापस लौटना पड़ा। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया और संबंधित अधिकारियों से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा। घटना के उसी दिन ‘देश गरिमा’ नामक एक अन्य भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहा। इस दौरान भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत ने उसे सुरक्षा घेरे में लेकर अरब सागर तक पहुंचाया। यह जहाज 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचने की संभावना है। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी समय खतरा उत्पन्न हो सकता है। भारतीय नौसेना ने अरब सागर और फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार पर अपनी मौजूदगी मजबूत कर दी है। आईएनएस विशाखापट्टनम सहित कुल सात युद्धपोत तैनात किए गए हैं, जो लगातार निगरानी कर रहे हैं। नौसेना के सूत्रों के अनुसार, ये युद्धपोत पूरी तरह सतर्क स्थिति में हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। वर्तमान में लगभग 14 भारतीय जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और सुरक्षित मार्ग मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नौसेना इन सभी जहाजों के कप्तानों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है और उन्हें समय-समय पर दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद अब तक 11 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुके हैं, जो नौसेना की सक्रियता और रणनीतिक योजना का परिणाम माना जा रहा है। नौसेना ने स्पष्ट किया है कि बिना सुरक्षा जांच और अनुमति के किसी भी जहाज को जोखिम वाले क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही क्षेत्र में मौजूद अन्य देशों की गतिविधियों और विशेष रूप से ईरानी सैन्य बलों की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, भारत के कड़े रुख और राजनयिक प्रयासों के बाद फिलहाल ईरान की ओर से भारतीय जहाजों के खिलाफ कोई आक्रामक कदम नहीं उठाया जा रहा है। हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही और नौसेना सतर्क बनी हुई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। ऐसे में भारतीय नौसेना की सक्रियता और सतर्कता देश के व्यापारिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर बनाए रखना और आवश्यक कदम उठाना बेहद जरूरी होगा, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।

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