टेंडर घोटाला: जेल से निकलते ही फिर रडार पर IAS संजीव हंस, विजिलेंस को तलाश; पंजाब से पटना तक के सफर में कैसे दागदार हुआ करियर?
पटना। बिहार का बहुचर्चित टेंडर घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) द्वारा ठेकेदार रिशु श्री और तीन सरकारी अधिकारियों की हालिया गिरफ्तारी के बाद, अब जांच एजेंसियों की सुई 1997 बैच के सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस पर आकर टिक गई है। विजिलेंस की टीम लगातार उनकी तलाश में जुटी है, लेकिन फिलहाल उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा है। अक्टूबर 2024 में जेल जाने, फिर दिसंबर 2025 में नई पोस्टिंग पाने से लेकर अब दोबारा रडार पर आने तक, संजीव हंस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

पंजाब से पटना: पुरस्कारों से विवादों तक का सफर
19 अक्टूबर 1973 को पंजाब में जन्मे संजीव हंस को प्रशासनिक सेवा विरासत में मिली थी। उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा खुद सिविल सर्वेंट थे। सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech करने के बाद संजीव ने UPSC परीक्षा पास की और 1997 में बिहार कैडर के IAS अधिकारी बने।
शानदार शुरुआत
अपने करियर के शुरुआती दौर में संजीव हंस ने डीएम से लेकर जल संसाधन और ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव जैसे रसूखदार पदों पर काम किया। 2008 में उन्हें ‘सत्येन मैत्रा मेमोरियल नेशनल लिटरेसी अवार्ड’ से भी नवाजा गया था।
विवादों की एंट्री
ऊर्जा विभाग में रहने के दौरान उन पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट और अन्य सरकारी टेंडरों में भारी हेरफेर, रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे।
अक्टूबर 2024 में जेल, दिसंबर 2025 में नई पोस्टिंग
स्मार्ट मीटर टेंडर घोटाले की परतें जब खुलीं, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसा। आय से अधिक संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं के पुख्ता सबूत मिलने के बाद अक्टूबर 2024 में ED ने संजीव हंस को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया और वे पटना की बेउर जेल भेज दिए गए। तकरीबन एक साल जेल में काटने के बाद, अक्टूबर 2025 में पटना हाई कोर्ट ने उन्हें कड़ी शर्तों पर जमानत दी। जेल से बाहर आने के कुछ ही समय बाद बिहार सरकार ने उनका निलंबन रद्द कर दिया और 30 दिसंबर 2025 को उन्हें राजस्व बोर्ड में अतिरिक्त सदस्य के पद पर तैनात किया गया।
अब विजिलेंस को क्यों है संजीव हंस की तलाश?
राजस्व बोर्ड में नई पोस्टिंग मिलने के बाद लगा था कि संजीव हंस के बुरे दिन कट गए, लेकिन स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की ताजा कार्रवाई ने उनकी नई पारी पर ग्रहण लगा दिया है।
गिरफ्तारियों से खुली पोल
विजिलेंस ने इस टेंडर घोटाले की कड़ियों को जोड़ते हुए सबसे पहले ठेकेदार रिशु श्री और उसके सहयोगी संतोष कुमार को दबोचा। इसके बाद घोटाले में शामिल तीन अधिकारियों—तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश कुमार सिंह की गिरफ्तारी हुई। इन सभी आरोपियों से हुई पूछताछ और दस्तावेजों की छानबीन में एक बार फिर मुख्य सूत्रधार के रूप में संजीव हंस का नाम सामने आया है। विजिलेंस की टीम अब उनसे आमने-सामने पूछताछ करना चाहती है, लेकिन फिलहाल संजीव हंस के ठिकाने का कोई सुराग नहीं मिल रहा है, जिससे बिहार के प्रशासनिक महकमे में एक बार फिर हड़कंप मच गया है।

