दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचाने की कवायद तेज, राज्यपाल कोटा बना सबसे मजबूत विकल्प

  • एमएलसी चुनाव की सूची से नाम गायब, अब मनोनीत सदस्य के रूप में विधान परिषद भेजने की तैयारी
  • 6 माह की संवैधानिक समय-सीमा बनी चुनौती, एनडीए में कुशवाहा समीकरण साधने की रणनीति पर नजर
  • एमएलसी चुनाव में मौका नहीं मिलने के बाद एनडीए के भीतर बैकअप प्लान पर चर्चा तेज

पटना। बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश (दीपक प्रकाश कुशवाहा) को लेकर यह सवाल इस समय राज्य के सियासी गलियारों में सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बना हुआ है। हाल ही में घोषित हुए 10 सीटों के विधान परिषद (MLC) चुनाव की लिस्ट में नाम न होने के बाद, अब राज्यपाल मनोनीत कोटा (Governor Nominee Quota) ही उनके लिए सबसे सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।
इस संभावना के पीछे कई बड़े राजनीतिक और तकनीकी कारण हैं:
उपेंद्र कुशवाहा का ‘बैकअप प्लान’
राजनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए गठबंधन के तहत अपने बेटे दीपक प्रकाश को सीधे मंत्री बनवाया था, तभी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक आंतरिक सहमति बनी थी। इस प्लान के तहत उन्हें विधानसभा या सीधे चुनाव के झंझट में डालने के बजाय राज्यपाल कोटे से खाली होने वाली सीटों के जरिए ही उच्च सदन (विधान परिषद) भेजने की रणनीति तय की गई थी।
समय-सीमा का तकनीकी पेंच
दीपक प्रकाश ने 20 नवंबर 2025 को मंत्री पद की शपथ ली थी। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, उन्हें 20 मई 2026 तक किसी भी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य था। तकनीकी रूप से उनकी यह 6 महीने की अवधि समाप्त हो चुकी है (या बेहद आखिरी पड़ाव पर है)। ऐसी स्थिति में यदि राज्यपाल कोटे के नामांकन में कुछ दिनों की देरी होती है, तो उन्हें एक बार औपचारिक इस्तीफा देकर दोबारा शपथ दिलाई जा सकती है (जैसा कि राजनीति में पहले भी कई मंत्रियों के साथ हुआ है)। इसके बाद राज्यपाल कोटे से उन्हें मनोनीत कर सदन का सदस्य बना दिया जाएगा। दीपक प्रकाश कुशवाहा को एनडीए सरकार में बनाए रखने के लिए राज्यपाल मनोनीत कोटा ही सबसे आसान रास्ता है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी की एनडीए में जो अहमियत है और कुशवाहा वोट बैंक को साधे रखने की जो मजबूरी है, उसे देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि सरकार उन्हें मनोनीत कोटे के जरिए हर हाल में सदन में पहुंचाएगी, ताकि उनका मंत्री पद सुरक्षित रहे।

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