मोतिहारी केंद्रीय कारा में महिला बंदी की मौत से हड़कंप, इलाज के दौरान सदर अस्पताल में तोड़ा दम
- देसी शराब मामले में गिरफ्तार महिला की तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में कराया गया भर्ती, परिजनों ने पुलिस और जेल प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
- मजिस्ट्रेट की निगरानी में कराया गया शव का पोस्टमार्टम, रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह होगी साफ़
मोतिहारी। बिहार के मोतिहारी जिले से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां केंद्रीय कारा में बंद एक महिला बंदी की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतका के परिजनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। वहीं पूरे इलाके में घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। महिला की मौत के बाद पुलिस प्रशासन और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। मृतका की पहचान पिपराकोठी थाना क्षेत्र के पंडितपुर गांव निवासी पार्वती देवी के रूप में हुई है। वह छबिला सहनी की पत्नी थीं। जानकारी के अनुसार 22 मई को पिपराकोठी थाना पुलिस ने उन्हें लगभग 30 लीटर देसी शराब के साथ गिरफ्तार किया था। शराबबंदी कानून के तहत पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था, जिसके बाद वह मोतिहारी केंद्रीय कारा में बंद थीं। बताया जा रहा है कि जेल में रहने के दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। प्रारंभिक जांच के बाद जेल प्रशासन ने उन्हें इलाज के लिए मोतिहारी सदर अस्पताल भेजा। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने महिला का इलाज शुरू किया, लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। काफी प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान ही महिला की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही मृतका के परिजन सदर अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के लोगों ने पिपराकोठी थाना पुलिस और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि पार्वती देवी पहले से बीमार थीं और उनकी तबीयत लगातार खराब रहती थी, इसके बावजूद उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। मृतका के परिवार का आरोप है कि यदि समय रहते उचित इलाज और देखभाल की व्यवस्था की जाती तो शायद उनकी जान बच सकती थी। परिजनों ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के दौरान महिला की स्वास्थ्य स्थिति को नजरअंदाज किया गया। उनका आरोप है कि जेल में भी महिला को समय पर समुचित इलाज नहीं मिल पाया, जिसके कारण उसकी हालत और बिगड़ती चली गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद नगर थाना पुलिस भी सदर अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की निगरानी में मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार फिलहाल मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जेल प्रशासन से भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी मांगी गई है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि महिला की तबीयत कब खराब हुई और इलाज के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद एक बार फिर जेलों में बंद कैदियों की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि जेलों में बंद बंदियों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए, क्योंकि कई बार बीमार कैदियों की हालत समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण गंभीर हो जाती है। खासकर महिला बंदियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी मानी जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराबबंदी कानून के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन गिरफ्तारी के बाद बंदियों की स्वास्थ्य स्थिति पर भी प्रशासन को बराबर ध्यान देना चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति की तबीयत पहले से खराब हो तो उसकी नियमित जांच और उपचार की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। घटना के बाद पंडितपुर गांव में भी शोक का माहौल बना हुआ है। मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस घटना को लेकर दुख व्यक्त कर रहे हैं। वहीं प्रशासन पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच में जुटा हुआ है। फिलहाल सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि महिला की मौत बीमारी, लापरवाही या किसी अन्य कारण से हुई। वहीं परिजन मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


