विधान परिषद चुनाव को लेकर भाजपा की रणनीति तेज, उम्मीदवार चयन पर 3 जून को होगा मंथन
- राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पटना में करेंगे वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक, संभावित प्रत्याशियों के नामों पर लगेगी मुहर
- बांकीपुर उपचुनाव और संगठन विस्तार भी एजेंडे में शामिल, आगामी चुनावों की तैयारी पर रहेगा विशेष फोकस
पटना। बिहार विधान परिषद की रिक्त सीटों पर होने वाले चुनाव और एक महत्वपूर्ण विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी नेतृत्व अब उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का 3 जून को पटना दौरा प्रस्तावित है, जिसे राज्य की राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार विधान परिषद की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव और एक सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि इन चुनावों में गठबंधन की स्थिति मजबूत बनी रहे और सभी सीटों पर प्रभावी रणनीति के साथ चुनाव लड़ा जाए। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पटना पहुंचने के बाद नितिन नवीन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इन बैठकों में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, संगठन के प्रति समर्पण और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर हो रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के इस सीट से इस्तीफा देने के कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी है। बांकीपुर को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है और इस सीट का राजनीतिक महत्व भी काफी अधिक है। ऐसे में पार्टी यहां उम्मीदवार चयन को लेकर बेहद सावधानी बरत रही है। माना जा रहा है कि बांकीपुर सीट पर उम्मीदवार के चयन में नितिन नवीन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। चूंकि यह क्षेत्र लंबे समय तक उनकी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, इसलिए पार्टी नेतृत्व यहां ऐसा चेहरा उतारना चाहता है जो संगठन और जनता दोनों के बीच मजबूत स्वीकार्यता रखता हो। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच भी इस सीट को लेकर लगातार चर्चा जारी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 3 जून को होने वाली बैठकों में केवल विधान परिषद चुनाव और उपचुनाव ही चर्चा का विषय नहीं होंगे, बल्कि संगठनात्मक मजबूती पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। बिहार भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश कार्यकारिणी, संगठनात्मक विस्तार और विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी अभी से अपनी तैयारियों को गति देने में जुटी है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संगठन जितना मजबूत होगा, चुनावी मुकाबले में पार्टी उतनी ही प्रभावी स्थिति में रहेगी। इसी कारण बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नितिन नवीन का यह दौरा केवल औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारतीय जनता पार्टी बिहार की भविष्य की चुनावी दिशा तय करने का प्रयास करेगी। विधान परिषद चुनाव और उपचुनाव के अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ समन्वय, चुनावी मुद्दों की पहचान और जनसंपर्क अभियान की रूपरेखा भी इस दौरान चर्चा का विषय बन सकती है। वर्तमान परिस्थितियों में बिहार की राजनीति तेजी से बदलते समीकरणों के दौर से गुजर रही है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन को और अधिक मजबूत बनाकर आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार होना चाहती है। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की निगाहें अब 3 जून की बैठकों पर टिकी हुई हैं, जहां कई महत्वपूर्ण फैसलों की संभावना जताई जा रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधान परिषद चुनाव और बांकीपुर उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी किन चेहरों पर भरोसा जताती है और संगठनात्मक स्तर पर कौन-कौन से नए निर्णय सामने आते हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह दौरा आने वाले समय की रणनीति तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।


