November 26, 2022

बिहार के विश्वदविद्यालयों के कोष से 500 करोड़ का हिसाब गायब, कुल सचिवों पर कार्रवाई करेगी नीतीश सरकार

पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों में 486 करोड़ रुपये का हिसाब ही नहीं मिल रहा है। यह मामला सभी 229 संबद्ध डिग्री कालेजों के अनुदान से संबंधित है। सरकार इसके लिए मौका देते-देते थक गई। वित्तीकय गड़बड़ी सामने आने के बाद अब कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने चार शैक्षणिक सत्र में स्नातक परीक्षाफल के आधार पर अनुदान राशि दी थी। नियमानुसार इस्तेमाल की गई राशि का हिसाब पहले ही मिल जाना चाहिए था, लेकिन इस मामले में विश्वविद्यालयों द्वारा लापरवाही बरती गई। अब शिक्षा विभाग उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने वाले कुलसचिवों पर वित्तीय अनियमितता संबंधी कार्रवाई की तैयारी में है। शिक्षा विभाग के मुताबिक संबद्ध डिग्री कालेजों को सत्र 2009-12, 2010-13, 2011-14 और 2012-15 के लिए अनुदान राशि दी गई थी। सत्र 2009-12 और 2010-13 का वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पास 4 करोड़ 78 लाख 2 हजार 600, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पास 15 करोड़ 64 लाख 92 हजार रुपये, बीएन मंडल विश्वविद्यालय के पास क्रमश 05 करोड़ 61 लाख 12 हजार 300 रुपये और 28 करोड़ 12 लाख 75 हजार 900 रुपये और जय प्रकाश विश्वविद्यालय के पास 01 करोड़ 50 लाख रुपये का बकाया है।
मगध विश्वयविद्यालय को भी देना है हिसाब
सत्र 2011-14 का मगध विश्वविद्यालय के पास 19 करोड़ 29 लाख 99 हजार 80 रुपये और 38 करोड़ 36 लाख 64 लाख 520 रुपये, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पास 06 करोड़ 89 लाख 50 लाख 260 रुपये एवं 18 करोड़ 91 लाख 75 हजार 440 रुपये, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पास 08 करोड़ 71 लाख 65 हजार 720 रुपये और 20 करोड़ 33 लाख 19 हजार 180 रुपये, बीएन मंडल विश्वद्यिालय के पास 8 करोड़ 70 लाख 8 हजार 222 रुपये तथा 21 करोड़ 19 लाख रुपये का हिसाब देना है।
भागलपुर विश्वरविद्यालय की भी होगी जांच
तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पास 22 करोड़ 68 लाख रुपये, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पास 32 करोड़ 43 लाख रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित है। सत्र 2012-15 के तहत मगध विश्वविद्यालय के पास 62 करोड़ 22 लाख 15 हजार रुपये, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पास 41 करोड़ 65 लाख 32 हजार 900 रुपये, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पास 23 करोड़ 51 लाख 68 हजार 500 रुपये का हिसाब मिलना बाकी है।

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