सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, दो फर्जी अभ्यर्थी गिरफ्तार

  • सिवान के दो परीक्षा केंद्रों पर पकड़े गए ‘मुन्नाभाई’, एक ही परीक्षा के मिले दो-दो प्रवेश पत्र
  • मोतिहारी और गोपालगंज में भी परीक्षा देने की कबूली बात, पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी

सिवान। बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। सिवान जिले में आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान दो फर्जी अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपियों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर परीक्षा में शामिल होने और भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप है। पुलिस ने उनके पास से एक ही परीक्षा के दो अलग-अलग प्रवेश पत्र सहित कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। यह कार्रवाई केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) द्वारा आयोजित परीक्षा के दौरान की गई। पुलिस और प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी की सतर्कता के कारण परीक्षा में धांधली की कोशिश समय रहते पकड़ ली गई। मामले के सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर प्रशासन ने और अधिक सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है।
दो परीक्षा केंद्रों पर हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार 17 जून को जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सिपाही भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। प्रथम और द्वितीय पाली की परीक्षा के दौरान अधिकारियों को कुछ अभ्यर्थियों की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं। इसके बाद विशेष निगरानी रखी गई। जांच के दौरान सरस्वती शिशु मंदिर परीक्षा केंद्र और दाउद मेमोरियल उर्दू गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र से दो अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ और दस्तावेजों की जांच में दोनों के खिलाफ गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में खुली पहचान
गिरफ्तार किए गए दोनों अभ्यर्थियों ने पूछताछ के दौरान अपनी वास्तविक पहचान बताई। इनमें पटना जिले के पीरपुरा थाना क्षेत्र निवासी त्रिलोकी कुमार का पुत्र सियाराम कुमार तथा जहानाबाद जिले के मखदूमपुर थाना क्षेत्र निवासी राजेश्वर यादव का पुत्र गौतम कुमार शामिल हैं पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने परीक्षा में अनियमित तरीके से शामिल होने की बात स्वीकार की है। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों पहले भी विभिन्न जिलों में आयोजित इसी भर्ती परीक्षा में शामिल हो चुके हैं।
दोहरे प्रवेश पत्र ने खोली पोलतलाशी के दौरान पुलिस को दोनों अभ्यर्थियों के पास से एक ही परीक्षा के दो अलग-अलग प्रवेश पत्र मिले। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दोनों प्रवेश पत्रों में जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज थी। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई कि भर्ती परीक्षा में सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने सभी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और उनकी तकनीकी जांच कराई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि दस्तावेजों की जांच से फर्जीवाड़े के तरीके और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान हो सकती है।
अन्य जिलों में भी दे चुके थे परीक्षा
जांच के दौरान दोनों आरोपियों ने यह स्वीकार किया कि वे 14 जून को मोतिहारी और गोपालगंज जिलों में भी आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा में शामिल हुए थे। इसके बाद 17 जून को वे सिवान पहुंचे और यहां भी परीक्षा देने का प्रयास किया। पुलिस का मानना है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि भर्ती परीक्षा में व्यवस्थित रूप से धांधली करने का प्रयास हो सकता है। विभिन्न जिलों में जाकर परीक्षा देने की बात से यह संकेत मिल रहा है कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है।
पुलिस नेटवर्क तक पहुंचने में जुटी
सिवान पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्हें फर्जी दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए और इस पूरे षड्यंत्र में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए मामले की गहराई से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया के कारण ही यह फर्जीवाड़ा उजागर हो सका। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित पहचान सत्यापन, जैविक प्रमाणीकरण और दस्तावेजों की डिजिटल जांच जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। सिवान में पकड़े गए दोनों फर्जी अभ्यर्थियों का मामला यह दर्शाता है कि भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने वाले गिरोह लगातार नए तरीके अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि पुलिस और प्रशासन की सतर्कता के कारण इस बार उनकी योजना सफल नहीं हो सकी। अब जांच एजेंसियों की नजर इस पूरे नेटवर्क पर है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों का भी खुलासा हो सकता है।

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