पेपर लीक और टेलीग्राम प्रतिबंध पर केंद्र सरकार पर बरसे अरविंद केजरीवाल, नीयत पर उठाए सवाल
- नीट पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक को बताया बेतुका कदम, कहा- इससे नहीं रुकेगा प्रश्नपत्र लीक
- पेपर लीक को अरबों रुपये का कारोबार बताते हुए केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, युवाओं से आंदोलन की अपील
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की पुनर्परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम मंच पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस फैसले को अव्यावहारिक और बेतुका बताते हुए कहा कि इस प्रकार के कदमों से प्रश्नपत्र लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान नहीं होने वाला है। केजरीवाल ने केंद्र सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार वास्तव में इस समस्या को समाप्त करने की इच्छुक नहीं है। दरअसल, नीट 2026 की पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने टेलीग्राम मंच की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया है। पिछले समय में हुई परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक प्रकरणों में इस मंच का नाम सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से अफवाहों, भ्रामक सूचनाओं और संभावित अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। हालांकि, इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केवल किसी संचार मंच को बंद कर देने से प्रश्नपत्र लीक जैसी गहरी समस्या समाप्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार मूल कारणों पर कार्रवाई करने के बजाय दिखावटी कदम उठा रही है। उनके अनुसार यदि प्रशासनिक व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो ऐसे प्रतिबंधों का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। पूर्व मुख्यमंत्री ने सामाजिक माध्यम पर जारी अपने वक्तव्य में कहा कि सरकार की नीयत पर ही सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने लिखा कि यदि सरकार वास्तव में प्रश्नपत्र लीक रोकना चाहती तो इसके लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था विकसित करती। सेना के विमानों से प्रश्नपत्रों का परिवहन कराना या टेलीग्राम मंच को बंद करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे उपाय केवल प्रतीकात्मक हैं और इनसे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना संभव नहीं होगा। केजरीवाल ने प्रश्नपत्र लीक को एक बड़े आर्थिक नेटवर्क से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल कुछ लोगों का अपराध नहीं, बल्कि एक विशाल अवैध कारोबार बन चुका है। उनके अनुसार इस कारोबार में बड़े स्तर पर आर्थिक लाभ अर्जित किया जाता है और इसके तार प्रभावशाली लोगों तक जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इस पूरे नेटवर्क को समाप्त कर दिया जाए तो कई लोगों के आर्थिक हित प्रभावित होंगे। अपने बयान में उन्होंने हाल ही में विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि प्रश्नपत्र लीक का कारोबार अरबों रुपये का है और इससे जुड़े आर्थिक संसाधनों का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों में भी किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक बहस को नया आयाम दे दिया है। गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने पहले भी कई बार कहा है कि यह समस्या देश के लाखों छात्रों और युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही है। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद जब कोई परीक्षा विवादों में घिर जाती है तो इसका सबसे अधिक नुकसान अभ्यर्थियों को उठाना पड़ता है। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से भी इस मुद्दे पर जागरूक होने और आवाज उठाने की अपील की है। उनके अनुसार जब तक समाज और छात्र समुदाय संगठित होकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग नहीं करेगा, तब तक इस प्रकार की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना कठिन होगा। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक जनदबाव आवश्यक है। दूसरी ओर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी का कहना है कि पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। एजेंसी का मानना है कि किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रामक सूचना या संभावित अवैध गतिविधि को रोकना परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इसी उद्देश्य से कुछ अस्थायी और एहतियाती निर्णय लिए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर सरकार परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठा रही है, वहीं विपक्ष इन उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पुनर्परीक्षा कितनी सफल और विवादमुक्त तरीके से संपन्न होती है तथा प्रश्नपत्र लीक की समस्या पर भविष्य में क्या स्थायी समाधान निकलता है।


