संपूर्ण क्रांति दिवस पर सीएम सम्राट ने जेपी को किया नमन, अर्पित की श्रद्धांजलि, लोकतांत्रिक मूल्यों को किया याद
- विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का संदेश, जेपी गंगा पथ क्षेत्र में एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
- महिलाओं के लिए विद्युत चालित स्कूटी पर अनुदान और सौर ऊर्जा योजनाओं को बढ़ावा देने की घोषणा, पर्यावरण रथ को दिखाई हरी झंडी
पटना। संपूर्ण क्रांति दिवस और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजधानी पटना में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। दिन की शुरुआत लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई, जबकि बाद में उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में शामिल होकर पौधारोपण किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सुबह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गांधी मैदान स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर पहुंचे, जहां उन्होंने माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान लोकनायक जयप्रकाश नारायण के योगदान, लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके संघर्ष और संपूर्ण क्रांति आंदोलन की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि लोकनायक के विचार आज भी समाज और शासन व्यवस्था के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री विश्व पर्यावरण दिवस के राज्यस्तरीय समारोह में शामिल हुए, जिसका आयोजन पटना के जेपी गंगा पथ स्थित समग्र उद्यान में किया गया था। इस अवसर पर उन्होंने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण अभियान का शुभारंभ किया और लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का आह्वान किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि जेपी गंगा पथ क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल और हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए यहां एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार इस पूरे क्षेत्र को एक आधुनिक हरित परिसर के रूप में विकसित कर रही है, जहां लोगों को स्वच्छ वातावरण, शुद्ध वायु और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि यहां भ्रमण पथ का निर्माण किया गया है तथा आगे भी पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार और झारखंड के विभाजन के समय बिहार में वन क्षेत्र का प्रतिशत काफी कम था और यह दस प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया था। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले वर्षों में वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चलाए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे जनभागीदारी का अभियान बनाना चाहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। मुख्यमंत्री ने लोगों से सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने की अपील भी की। उन्होंने बताया कि महिलाओं को विद्युत चालित स्कूटी खरीदने पर 12 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर आर्थिक सहायता प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से न केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा बल्कि लोगों के खर्च में भी कमी आएगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर पर्यावरण जागरूकता रथ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह विशेष रथ राज्य के विभिन्न जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छता, वृक्षारोपण और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक करेगा। अधिकारियों ने बताया कि पर्यावरण रथ के माध्यम से स्कूलों, महाविद्यालयों, पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके जरिए लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और हरित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। विश्व पर्यावरण दिवस और संपूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने एक ओर जहां लोकतांत्रिक मूल्यों और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आदर्शों को स्मरण किया, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा। सरकार को उम्मीद है कि जनसहभागिता के माध्यम से बिहार को अधिक हरित, स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त होगी।


