भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पुल! बक्सर में उद्घाटन के महज 4 दिन बाद ही ढहा 26 करोड़ का आरओबी, जनता में भारी आक्रोश

अमृतवर्षा ब्यूरो, बक्सर/इटाढ़ी। बिहार में चालू होते ही पुलों के क्षतिग्रस्त होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला बक्सर जिले के इटाढ़ी रेलवे गुमटी का है, जहाँ भारी-भरकम बजट से बनकर तैयार हुआ रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) उद्घाटन के मात्र चार दिन बाद ही जमींदोज होने की कगार पर पहुंच गया। इस घटना ने एक बार फिर राज्य में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है।
26 करोड़ की लागत, 4 दिन भी नहीं टिकी सरकार की ‘गारंटी’
जानकारी के अनुसार, इटाढ़ी रेलवे गुमटी पर आम जनता को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए 26 करोड़ 40 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से इस रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण कराया गया था। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि इस पुल के चालू होने से उनका सफर आसान होगा, लेकिन किसे पता था कि करोड़ों की यह योजना महज चार दिनों में ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी।
पाया संख्या 5 ढहा, लोहे की प्लेटों से सच छुपाने की कोशिश!
पुल चालू होने के चौथे दिन ही इसका पाया संख्या 5 पूरी तरह से ढह गया। पाया ढहने की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में स्थानीय प्रशासन ने किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका को देखते हुए पुल पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया। मामले को रफा-दफा करने और तकनीकी खामी को छिपाने के लिए आनन-फानन में क्षतिग्रस्त हिस्से को लोहे की प्लेटों से ढक दिया गया, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया है।
कमीशनखोरी और घटिया निर्माण का आरोप, सड़क पर उतरी जनता
इस घटना के बाद से बक्सर और इटाढ़ी के स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। आक्रोशित नागरिकों ने सरकार, विभाग और संवेदक (ठेकेदार) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि यह कोई सामान्य तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि खुलेआम की गई कमीशनखोरी और बेहद घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का नतीजा है। जनता का कहना है कि जो पुल उद्घाटन के चार दिन बाद ही जवाब दे गया, वह भविष्य में कितने बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहा था, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
अमृतवर्षा के तीखे सवाल:
26.40 करोड़ के इस बड़े प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग कर रहे इंजीनियरों ने निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की?
क्या उद्घाटन से पहले इस आरओबी का सेफ्टी और लोड टेस्ट सही तरीके से किया गया था?
उद्घाटन के मात्र 4 दिन बाद पाया ढहने के जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों पर क्या सरकार कोई सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई करेगी?

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