अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सख्त कार्रवाई की तैयारी, पटना के 239 होटल और अस्पतालों पर सीलिंग का खतरा

  • 15 जून के बाद शुरू हो सकती है कार्रवाई, तीसरी और अंतिम चेतावनी के बावजूद कई संस्थानों ने नहीं सुधारी व्यवस्थाएं
  • मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड के बाद सरकार सतर्क, सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा और कड़ी निगरानी के निर्देश

पटना। राजधानी पटना में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। आग से बचाव के आवश्यक मानकों का पालन नहीं करने वाले होटलों और निजी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी जारी की गई है। बिहार अग्निशमन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर नहीं किया गया तो 15 जून के बाद ऐसे संस्थानों को सील किया जा सकता है। विभाग की सूची में कुल 239 संस्थान शामिल हैं, जिनमें 161 होटल और 78 निजी अस्पताल हैं। हाल के दिनों में मुजफ्फरपुर स्थित एक निजी अस्पताल में लगी भीषण आग की घटना ने राज्य प्रशासन को गंभीर रूप से चिंतित कर दिया है। इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद सरकार ने राज्यभर में अस्पतालों और सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। इसी क्रम में पटना जिले के होटलों और अस्पतालों का विस्तृत निरीक्षण कराया गया।
अस्पतालों में मिली कई गंभीर खामियां
अग्निशमन विभाग द्वारा कराए गए सुरक्षा परीक्षण में यह पाया गया कि पटना जिले के कुल 462 निजी अस्पतालों में से 384 अस्पतालों ने सुरक्षा संबंधी आवश्यक मानकों को पूरा कर लिया है। हालांकि 78 अस्पताल अब भी निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर पाए हैं। निरीक्षण के दौरान कई अस्पतालों में अग्निशमन प्रणाली की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। कहीं अग्निशमन यंत्र अनुपयोगी मिले तो कहीं आपातकालीन निकास मार्गों की समुचित व्यवस्था नहीं थी। कुछ अस्पतालों में पुराने और जर्जर विद्युत तार भी पाए गए, जिन्हें संभावित दुर्घटना का बड़ा कारण माना गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी लापरवाहियां किसी भी समय बड़े हादसे को जन्म दे सकती हैं।
होटलों की स्थिति भी चिंताजनक
केवल अस्पताल ही नहीं, राजधानी के कई होटल भी सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतर सके हैं। जिले के 241 होटलों की जांच के दौरान केवल 80 होटल ही सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करते पाए गए। शेष होटलों में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त उपकरणों और व्यवस्थाओं का अभाव देखा गया। कई होटलों में अग्निशमन यंत्र या तो उपलब्ध नहीं थे अथवा उनका रखरखाव नहीं किया गया था। कुछ स्थानों पर आपातकालीन निकास मार्गों को अवरुद्ध पाया गया, जिससे किसी दुर्घटना की स्थिति में लोगों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
तीसरी और अंतिम चेतावनी जारी
अग्निशमन विभाग ने पहले भी कई संस्थानों को सुधारात्मक कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किए थे। इसके बावजूद 30 होटल और 30 अस्पताल ऐसे पाए गए जिन्होंने दो बार चेतावनी मिलने के बाद भी आवश्यक कदम नहीं उठाए। इसके बाद विभाग ने उन्हें तीसरी और अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। जिला अग्निशमन पदाधिकारी रितेश कुमार पांडेय ने बताया कि निरीक्षण के दौरान सामने आई खामियों को गंभीरता से लिया गया है। जिन संस्थानों ने लगातार निर्देशों की अनदेखी की है, उनके खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार ने अपनाया सख्त रुख
मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद राज्य सरकार ने भी स्पष्ट संकेत दिया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सूचना एवं जनसंपर्क तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि घटना की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, नियमों का उल्लंघन या प्रबंधन की गलती सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य राज्य के सभी अस्पतालों, होटलों और सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। प्रशासन का मानना है कि नियमित निरीक्षण, कठोर निगरानी और समय पर सुधारात्मक कदमों के माध्यम से भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से राजधानी पटना में अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और किसी भी संभावित दुर्घटना से जनहानि को रोका जा सके।

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