टेंडर किंग रिशु श्री: 12 लग्जरी गाड़ियाँ, एक ही नंबर 5851, उनपर विधानसभा स्टिकर
अमृतवर्षा ब्यूरो, पटना। रिशु श्री प्रकरण में परतें उखड़ने के साथ ही अब तक की सबसे चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। एक दो नहीं, बल्कि दर्जन भर (12) ऐसी चमचमाती लग्जरी गाड़ियाँ जांच एजेंसियों के रडार पर हैं, जो इस पूरे मामले को एक बेहद जटिल और हाई-प्रोफाइल मोड़ दे रही हैं। ये कोई साधारण गाड़ियाँ नहीं हैं। इनमें से प्रत्येक की कीमत दस-पंद्रह लाख नहीं, बल्कि एक करोड़ से लेकर कई करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। एक साथ इतनी महंगी गाड़ियों का काफिला किसी सामान्य शौक का हिस्सा नहीं हो सकता। लेकिन इससे भी ज़्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इन सभी लग्जरी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर लगभग एक जैसे — 5851 हैं। यह ‘फैंसी’ नंबर का एक ही व्यक्ति के पास इतनी बड़ी संख्या में होना, न केवल एक विशिष्ट स्टेटस सिंबल की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि इस व्यक्ति के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं थी।
पोर्शे से लेकर लैंड क्रूजर तक: जांच एजेंसियों के हाथ लगे गाड़ियों के दस्तावेज
जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य जांच एजेंसियों को रिशु श्री के पास मौजूद कई बेहद महंगी और प्रीमियम लग्जरी गाड़ियों के पुख्ता दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों ने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। रिशु श्री के इस आलीशान बेड़े में शामिल प्रमुख गाड़ियों के नाम इस प्रकार हैं:
पोर्शे मैकान (Porsche Macan)
बीएमडब्ल्यू (BMW)
डिस्कवरी स्पोर्ट (Discovery Sport)
टोयोटा लैंड क्रूजर (Toyota Land Cruiser)
बीएमडब्ल्यू आर नाइन टी स्क्रैम्बलर (BMW R nineT Scrambler – सुपरबाइक)
2022 से 2024 के बीच हुआ धन का ‘महा-विस्फोट’
ईडी (ED) के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प टाइमलाइन सामने आई है। रिशु श्री की इन अधिकांश लग्जरी गाड़ियों और बेनामी संपत्तियों की ताबड़तोड़ खरीदारी मुख्य रूप से साल 2022 से 2024 के बीच की गई थी। महज दो साल के इस छोटे से अंतराल के भीतर करोड़ों रुपये की इन गाड़ियों और संपत्तियों को खरीदना इस बात की तरफ साफ इशारा करता है कि इसी अवधि के दौरान काले धन या अवैध कमाई का सबसे बड़ा प्रवाह हुआ था।
सबसे बड़ा सवाल: विधानसभा का स्टिकर कैसे मिला?
इस कहानी में असली मोड़ तब आता है, जब इन गाड़ियों पर लगे बिहार विधानसभा के कार पास या स्टीकर की बात सामने आती है। सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री की कई गाड़ियों पर विधानसभा से संबंधित आधिकारिक पास लगे हुए देखे गए। यहीं से कहानी और दिलचस्प हो जाती है। विधानसभा का स्टिकर या पास मिलना कोई आसान बात नहीं है; यह एक ऐसा विशेषाधिकार है जो आमतौर पर केवल जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को ही मिलता है। अब सवाल यह उठता है कि रिशु श्री, जिसका कोई आधिकारिक राजनीतिक पद या जनप्रतिनिधि होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है, उसे यह विशेष सुविधा कैसे मिली? और इससे भी महत्वपूर्ण सवाल: उसे यह सुविधा किसके प्रभाव से मिली? सिर्फ नौकरशाही तक पहुँच होने से ऐसे विशेषाधिकार मिलना आसान नहीं होता। यह स्पष्ट संकेत है कि रिशु श्री की पहुँच प्रभावशाली राजनीतिक हलकों तक भी बहुत मज़बूत हो सकती थी।
जांच जारी: बड़े नामों के खुलासे की आहट?
हालांकि, अब तक जांच एजेंसियों ने किसी राजनीतिक व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर आधिकारिक रूप से कोई खुलासा नहीं किया है। इसलिए किसी भी नेता या जनप्रतिनिधि का नाम लेना उचित नहीं होगा। लेकिन जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि रिशु श्री के मोबाइल और व्हाट्सएप चैट से कई अहम नाम और कड़ियां सामने आई हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सभी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं, क्योंकि इससे जांच प्रभावित होने की आशंका है। लेकिन इतना तय है कि जैसे-जैसे रिशु श्री प्रकरण की परतें खुलेंगी और 2022-2024 के बीच हुए इन वित्तीय लेन-देन के स्रोतों का पता चलेगा, कई बड़े रसूखदार चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। नाम कब सामने आएंगे, यह जांच पर निर्भर करेगा। लेकिन इतना ज़रूर है कि इस मामले पर अब कई प्रभावशाली लोगों की नज़र टिकी हुई है। क्या यह सिर्फ एक संपन्न व्यक्ति की कहानी है, या इसके पीछे सत्ता के गलियारों तक फैले किसी गहरे नेटवर्क की? अमृतवर्षा समाचार की नज़र इस पर बनी रहेगी।


