महंगी हुई व्यावसायिक गैस ने बढ़ाई कारोबारियों की चिंता, बिहार में खपत में भारी गिरावट

  • कुछ महीनों में 70 प्रतिशत तक बढ़ी व्यावसायिक गैस की कीमत, होटल और रेस्तरां संचालक वैकल्पिक ईंधन की ओर मुड़े
  • पटना में गैस खपत में 26 प्रतिशत और बिहार में 35 प्रतिशत की कमी, खाद्य व्यवसायों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

पटना। व्यावसायिक रसोई गैस सिलिंडर की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब बिहार के होटल, रेस्तरां, मिठाई दुकान और अन्य खाद्य व्यवसायों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कीमतों में हुई भारी वृद्धि ने कारोबारियों की लागत बढ़ा दी है। परिणामस्वरूप गैस की खपत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है और कई व्यवसायी अब वैकल्पिक ईंधन की ओर रुख करने को मजबूर हो गए हैं। जानकारी के अनुसार फरवरी माह में 19 किलोग्राम वाला व्यावसायिक रसोई गैस सिलिंडर लगभग 2,010 रुपये में उपलब्ध था, जबकि वर्तमान समय में इसकी कीमत बढ़कर 3,421 रुपये तक पहुंच गई है। यानी कुछ ही महीनों में गैस सिलिंडर की कीमत में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी ने छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों के सामने आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। तेल विपणन कंपनी के आंकड़ों के अनुसार राजधानी पटना में फरवरी के दौरान हर महीने लगभग 32,305 व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की खपत होती थी। अब यह संख्या घटकर 23,742 सिलिंडर रह गई है। इस प्रकार पटना में गैस खपत में लगभग 26.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वहीं पूरे बिहार की बात करें तो राज्य में व्यावसायिक गैस की खपत 68,729 सिलिंडर से घटकर 44,596 सिलिंडर रह गई है, जो करीब 35 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाती है। व्यावसायिक गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण कई होटल और रेस्तरां संचालक अब कोयला, विद्युत आधारित चूल्हों और अन्य विकल्पों का उपयोग बढ़ाने लगे हैं। पटना के राजीव नगर स्थित एक पारिवारिक रेस्तरां के संचालक ने बताया कि पहले उनके प्रतिष्ठान में हर महीने 20 से 30 गैस सिलिंडरों की खपत होती थी, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण अब उन्होंने कोयले की भट्ठियों का उपयोग बढ़ा दिया है। वर्तमान में उनके यहां महीने भर में केवल दो गैस सिलिंडरों की आवश्यकता पड़ रही है। इसी तरह एक अन्य रेस्तरां संचालक पंकज कुमार का कहना है कि गैस की बढ़ती लागत के कारण अब कोयला और विद्युत प्रेरित चूल्हों का उपयोग पहले की तुलना में अधिक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल ग्राहकों पर सीधा आर्थिक बोझ नहीं डाला गया है, लेकिन विभिन्न प्रकार की छूट और विशेष रियायतों में कटौती करनी पड़ी है। बिरयानी व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। एक प्रतिष्ठित बिरयानी प्रतिष्ठान के संचालक के अनुसार उनके यहां ग्राहकों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि बिरयानी बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया में गैस का विशेष महत्व होता है, इसलिए वे पूरी तरह वैकल्पिक ईंधन पर निर्भर नहीं हो सकते। यही कारण है कि उन्हें अब भी हर महीने 12 से 15 गैस सिलिंडरों की आवश्यकता पड़ती है। मिठाई व्यवसाय पर भी इसका असर पड़ा है। एक प्रसिद्ध खाजा भंडार के संचालक ने बताया कि पहले उनके यहां हर महीने लगभग 30 गैस सिलिंडरों की खपत होती थी, जो अब घटकर करीब 20 सिलिंडर रह गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती महंगाई और लागत के कारण ग्राहकों की संख्या में भी कमी देखने को मिल रही है। खाद्य व्यवसाय से जुड़े कई प्रतिष्ठान अब मेन्यू की कीमतों में वृद्धि करने पर विचार कर रहे हैं। कुछ रेस्तरां संचालकों का कहना है कि यदि गैस की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो उन्हें खाद्य पदार्थों के दाम 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाने पड़ सकते हैं। इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है। दूसरी ओर कई छोटे भोजनालयों और मिठाई दुकानों ने खर्च नियंत्रित करने के लिए कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग बढ़ा दिया है। हालांकि पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में व्यवसायी पुनः कोयले की ओर लौटते हैं तो इससे प्रदूषण की समस्या भी बढ़ सकती है। व्यापार जगत का कहना है कि यदि व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कीमतों में स्थिरता नहीं आई तो आने वाले समय में खाद्य उद्योग पर इसका और व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल बढ़ती लागत, घटती खपत और कम होते ग्राहकों के बीच कारोबारी संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रहे हैं।

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