मॉनसून की दस्तक में हो सकती है देरी, केरल में अब सप्ताह के अंत तक बारिश पहुंचने की उम्मीद

  • मौसम विभाग के पूर्व अनुमान फिर पड़े कमजोर, हवाओं की कमी बनी मॉनसून की रफ्तार में बाधा
  • बंगाल की खाड़ी की चक्रवाती गतिविधियों का असर, पूरे देश में मॉनसून की प्रगति पर टिकी निगाहें

नई दिल्ली। देशभर में भीषण गर्मी के बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का इंतजार अभी और लंबा हो सकता है। सामान्य परिस्थितियों में एक जून तक केरल पहुंचने वाला मॉनसून इस बार निर्धारित समय पर दस्तक नहीं दे सका है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अब केरल में मॉनसून की शुरुआत इस सप्ताह के अंत तक हो सकती है। हालांकि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अभी तक नई आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन विभिन्न मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि पांच से छह जून के बीच मॉनसून केरल तट पर पहुंच सकता है। मॉनसून के आगमन में हो रही देरी ने किसानों, व्यापारियों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हर वर्ष मॉनसून भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादन और जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इसकी प्रगति पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मॉनसून की गति को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारण दक्षिण भारत के ऊपर आवश्यक ऊपरी वायुमंडलीय हवाओं का पूरी तरह सक्रिय नहीं होना है। मॉनसून के सुचारू रूप से आगे बढ़ने के लिए मजबूत हवाओं का स्थापित होना आवश्यक होता है। वर्तमान परिस्थितियों में इन हवाओं को पूरी तरह विकसित होने में तीन से चार दिन और लग सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में मॉनसून की शुरुआत इस बार बहुत तेज और व्यापक नहीं होगी। प्रारंभिक चरण में हल्की से मध्यम वर्षा देखने को मिल सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे वर्षा की तीव्रता बढ़ेगी और मॉनसून अपनी सामान्य गति प्राप्त करेगा। इसका मतलब यह है कि शुरुआती दिनों में लोगों को झमाझम बारिश के बजाय रुक-रुक कर होने वाली वर्षा का अनुभव हो सकता है। वैश्विक पूर्वानुमान प्रणाली मॉडल के अनुसार, दक्षिण भारत के ऊपर पूर्वी हवाओं के मजबूत होने से पहले पश्चिम से आने वाली नमी युक्त हवाओं और एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव समाप्त होना आवश्यक है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक मॉनसून की प्रगति धीमी बनी रह सकती है। इस वर्ष मौसम विभाग के पूर्वानुमान पूरी तरह सटीक साबित नहीं हुए हैं। पहले यह संभावना जताई गई थी कि मॉनसून 26 मई तक केरल पहुंच सकता है। इसके बाद सामान्य तिथि एक जून बताई गई थी, लेकिन दोनों ही समय सीमाओं में मॉनसून केरल नहीं पहुंच पाया। पिछले वर्ष मॉनसून 24 मई को ही केरल में प्रवेश कर गया था, जिससे इस वर्ष की स्थिति और अधिक चर्चा का विषय बन गई है। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि मॉनसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा के लिए तीन प्रमुख शर्तों का पूरा होना आवश्यक है। पहली शर्त यह है कि केरल के कम से कम 60 प्रतिशत मौसम केंद्रों पर लगातार वर्षा दर्ज हो। दूसरी शर्त अरब सागर क्षेत्र में निर्धारित गति से अनुकूल हवाओं का बहना है। तीसरी और अंतिम शर्त पर्याप्त मात्रा में बादलों की मौजूदगी है। वर्तमान समय में वर्षा और बादलों की स्थिति संतोषजनक मानी जा रही है, लेकिन हवाओं की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। जानकारों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती परिस्थितियों के कारण हवाएं कमजोर बनी हुई हैं। इसी वजह से मॉनसून का प्रवाह प्रभावित हुआ है। हालांकि आने वाले दिनों में हवाओं के मजबूत होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, जिससे मॉनसून को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। देश के अन्य हिस्सों में भी मॉनसून की प्रगति को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। उत्तर प्रदेश में सामान्य रूप से मॉनसून 20 से 25 जून के बीच पहुंचता है, जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इसकी आमद 25 जून के आसपास होती है। फिलहाल मौसम विभाग ने उत्तर भारत में मॉनसून के पहुंचने की नई संभावित तारीखों पर कोई स्पष्ट जानकारी जारी नहीं की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में मॉनसून 30 जून तक पूरे देश को अपने प्रभाव क्षेत्र में ले लेता है। यदि आगामी दिनों में मौसम संबंधी परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो मॉनसून की प्रगति में तेजी आ सकती है। फिलहाल किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी की निगाहें आसमान और मौसम विभाग के अगले आधिकारिक पूर्वानुमान पर टिकी हुई हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिन मॉनसून की दिशा और गति तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। यदि हवाएं अपेक्षित रूप से मजबूत होती हैं, तो दक्षिण भारत में वर्षा गतिविधियों में तेजी आएगी और इसके बाद मॉनसून देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ना शुरू कर देगा।

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