सिस्टम की ‘3% वाली चाबी’ और 13 साल में शून्य से अरबपति बनने की खौफनाक दास्तान

  • विशेष खोजी रिपोर्ट: टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई से अफसरों को ‘यूरोप की सैर’ और ‘टैरेस गार्डन’ का तोहफा देने वाला रिशु श्री अब सलाखों के पीछे

अमृतवर्षा ब्यूरो, पटना। कहानी किसी बॉलीवुड की क्राइम-थ्रिलर फिल्म जैसी है, लेकिन इसके किरदार काल्पनिक नहीं, बल्कि बिहार के प्रशासनिक गलियारे के रसूखदार नाम हैं। एक अदने से दवा दुकानदार का बेटा, जो महज 13 साल पहले सीमित आमदनी के बीच बड़े ख्वाब देख रहा था, आज बिहार के सबसे बड़े भ्रष्टाचार सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बनकर उभरा है। नाम है—रिशु श्री। 27 मई 2026 को जब स्टेट विजिलेंस यूनिट (SVU) ने रिशु के ठिकाने पर दबिश दी, तो वह विदेश भागने की फिराक में था। 11 घंटे की इस मैराथन छापेमारी ने बिहार की नौकरशाही के उस ‘शहद’ को बेनकाब कर दिया, जिसे चखने की लत ने कई बड़े अफसरों का ईमान डोलने पर मजबूर कर दिया।
2012 से 2026: पानी की टंकी से ‘सिस्टम की नब्ज’ तक
साल 2012 में पटना एनआईटी (NIT) से बीटेक करने के बाद रिशु को 2013 में एक गुजराती कंपनी में नौकरी मिली। काम था—BUIDCO के तहत पटना में पानी की टंकी का निर्माण। लेकिन रिशु की दिलचस्पी टंकियों में कम और सिस्टम के सुराखों में ज्यादा थी। उसने बहुत जल्द समझ लिया कि सरकारी टेंडरों का ताला किस चाबी से खुलता है।
“वह जादुई चाबी थी—3% कमीशन।”
इंजीनियर से लेकर बड़े अधिकारियों तक, जिसे जितना चाहिए, रिशु इस 3 फीसदी के फॉर्मूले से सबकी जेबें भरता गया। यह महज एक नंबर नहीं, बल्कि बिहार की ब्यूरोक्रेसी का वह कड़वा सच था, जिसे रिशु ने घोटकर पी लिया था। इसी का नतीजा था कि अगले 13 सालों में उसने जल संसाधन विभाग से अकेले 12 बड़े टेंडर हथियाए और 5 बड़ी कंपनियों का मालिक बन बैठा।
करोड़ों की गाड़ियां, 61 जमीनें और अय्याशी का साम्राज्य
जांच एजेंसियों के सामने जो रिशु के साम्राज्य का कच्चा चिट्ठा खुला है, वह आंखें चौंधियाने वाला है:
लक्जरी गाड़ियां: गैराज में BMW, पोर्श मैकन और डिस्कवरी स्पोर्ट्स जैसी 2.5 करोड़ की गाड़ियां।
अचल संपत्ति: देश के अलग-अलग शहरों में 61 जमीनों की डीड (Deeds)।
विदेशी दौरे: महज 16 महीनों के भीतर 13 बार विदेश यात्राएं।
सोना और कैश: छापेमारी में 2.25 करोड़ के जेवरात और लाखों का कैश बरामद।
आईएएस अफसरों को ‘यूरोप टूर’ और ‘टैरेस गार्डन’ का नजराना
ईडी (ED) और एसवीयू (SVU) के सामने रिशु के कबूलनामे ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। आरोपों के मुताबिक, बिहार के विकास के पैसे से रसूखदार अफसर ऐशो-आराम फरमा रहे थे:
IAS योगेश कुमार सागर: रिशु के खर्चे पर अपने परिवार के 8 सदस्यों के साथ यूरोप (विएना, साल्जबर्ग, वोल्फगैंग) की सैर पर गए। इस टूर पर 21.92 लाख का भुगतान रिशु ने किया था। (फिलहाल सस्पेंड)
IAS अभिलाषा शर्मा: इनके घर की छत पर प्रकृति का लुत्फ उठाने के लिए ₹9 लाख का आलीशान टैरेस गार्डन (बागवानी) रिशु के सौजन्य से तैयार हुआ। (फिलहाल सस्पेंड)
सिर्फ रिशु नहीं, पूरा कुआं ही भांग में डूबा है
रिशु तो महज एक जरिया था, असल मगरमच्छ तो विभागों के भीतर बैठे थे। एसवीयू की कार्रवाई में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
तारिणी दास (चीफ इंजीनियर): घर से 8.53 करोड़ कैश बरामद।
मुमुक्षु चौधरी (संयुक्त सचिव): ठिकानों से 2 करोड़ बरामद।
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (BUIDCO): 1 करोड़ कैश बरामद।
सांसद पप्पू यादव का बड़ा दावा: सेक्स रैकेट का भी कोण?
इस पूरे मामले में अब राजनीतिक मोड़ भी आ गया है। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने इस सिंडिकेट पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि टेंडर हथियाने और अधिकारियों को खुश रखने के लिए रिशु श्री नेताओं और बड़े अफसरों तक युवतियां भेजता था और इसके पीछे एक बड़ा ‘सेक्स रैकेट’ काम कर रहा था। पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस एंगल से भी मामले की तफ्तीश कर रही हैं।
संपादकीय दृष्टिकोण: चाणक्य की बात और आज का बिहार
ढाई हजार साल पहले आचार्य चाणक्य ने ‘अर्थशास्त्र’ में लिखा था—“जो अधिकारी राजकोष में हाथ डाले, उसे वैसे ही पकड़ो जैसे जीभ पर रखे शहद की पहचान होती है, क्योंकि उसे चखे बिना छुपाया नहीं जा सकता।” आज 2026 में बिहार के टैक्सपेयर्स का वही शहद इन भ्रष्टाचारियों की जीभ पर साफ दिख रहा है। सवाल यह नहीं है कि रिशु पकड़ा गया; सवाल यह है कि जब उसने पहली बार किसी इंजीनियर को 3% का ऑफर दिया होगा, तो वह पहली ‘हां’ कहां से आई थी? क्या वह सिर्फ एक इंजीनियर की सहमति थी, या सत्ता के शीर्ष पर बैठे सफेदपोशों का वरदहस्त? जांच की आंच अब दूर तक जाएगी, क्योंकि यह खेल का अंत नहीं, बल्कि सिर्फ शुरुआत है।

— बन बिहारी

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