बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव: तेजस्वी समेत विपक्ष के लिए बड़ा मौका…सधी रणनीति से बदल सकता है इतिहास…
पटना। बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होने हैं। बांकीपुर के विधायक नितिन नवीन को भाजपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया है। इसके बाद में राज्यसभा का सदस्य बनाकर उन्हें संसद भवन भेज दिया गया।उनके इस्तीफे के बाद बांकीपुरु सीट खाली है। बांकीपुर सीट अपने पहले चुनाव से लेकर अभी तक भाजपा की सीट रही है और नितिन नवीन लगातार 2010 से बांकीपुर से चुनाव जीत रहे हैं। चार बार से यह सीट बीजेपी जीत रही है। इस बार यहां से भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री या फिर विधान पार्षद, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है,पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय मयूख को टिकट मिलने की संभावना ज्यादा है। हालांकि रेस में कई अन्य कायस्थ उम्मीदवार भी लगे हैं। पिछली बार रेखा गुप्ता को बांकीपुर से राजद ने टिकट दिया था। लेकिन इस बार का बांकीपुर का चुनाव भाजपा के लिए तो बहुत महत्वपूर्ण है ही क्योंकि यह सीट उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष ने खाली की है।साथ ही यह चुनाव तेजस्वी यादव के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।यह एक बड़ा मौका है कि एक चक्रव्यूह को तैयार कर तेजस्वी यादव बांकीपुर सीट पर बतौर विपक्ष कुछ इस प्रकार से चुनाव लड़े कि उनकी यह जीत बिहार के राजनीति में विपक्ष के उपस्थिति का एहसास करा दे।दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव में बिहार में विपक्ष का आकार बहुत छोटा हो गया है। राजद- कांग्रेस तथा वाम दलों के गठबंधन को सिर्फ 35 सीटें आईं।एनडीए को 202 सीट की अपार बहुमत नसीब हुई। ऐसे में अगर बांकीपुर के सीट पर राजद-कांग्रेस वामदलों का गठबंधन सधी हुई रणनीति के साथ चुनाव लड़ता है तथा किसी ऐसे प्रत्याशी को मैदान में उतरता है। जो बांकीपुर सीट जीतकर इतिहास रच सके। तो निश्चित तौर पर बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम बिहार में बदहवास विपक्ष के लिए ‘कोरामिन’ साबित होगा।


