ट्रंप के सोशल मीडिया साझा पर विवाद, भारत और चीन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी से बढ़ी आलोचना

  • रेडियो प्रस्तोता के पत्र को साझा करने पर घिरे, नस्लीय टिप्पणी को लेकर उठे सवाल
  • जन्मजात नागरिकता कानून पर बहस तेज, 14वें संशोधन को चुनौती देने पर भी चर्चा

नई दिल्ली। अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है, जब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक ऐसी टिप्पणी साझा की, जिसमें भारत और चीन को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था। इस साझा संदेश के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना तेज हो गई है और इसे नस्लीय दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, रेडियो प्रस्तोता माइकल सेवेज द्वारा लिखे गए एक पत्र को ट्रंप ने साझा किया। इस पत्र में भारत और चीन को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। सेवेज ने दावा किया था कि एशियाई देशों के लोग अमेरिका जाकर जन्मजात नागरिकता कानून का लाभ उठा रहे हैं। उनके अनुसार, लोग अमेरिका जाकर वहां बच्चे को जन्म देते हैं, जिससे वह बच्चा स्वतः ही अमेरिकी नागरिक बन जाता है, और बाद में पूरा परिवार वहां बस जाता है। सेवेज ने अपने पत्र में एशियाई देशों को लेकर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया और उन्हें “नरक का द्वार” तक कह दिया। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से अमेरिका को नुकसान हो रहा है। उन्होंने प्रवासियों के लिए भी अपमानजनक भाषा का उपयोग करते हुए उन्हें “लैपटॉप वाले गैंगस्टर” कहा और दावा किया कि इन लोगों ने अमेरिकी व्यवस्था को प्रभावित किया है। ट्रंप द्वारा इस पत्र को साझा करने के बाद विवाद और गहरा गया है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार की टिप्पणी न केवल असंवेदनशील है, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत और चीन जैसे बड़े देशों के संदर्भ में इस तरह के शब्दों का उपयोग वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी उचित नहीं माना जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच जन्मजात नागरिकता कानून को लेकर भी बहस तेज हो गई है। अमेरिका में यह अधिकार चौदहवां संशोधन के तहत मिलता है, जिसके अनुसार अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा स्वतः नागरिक बन जाता है। ट्रंप इस प्रावधान को बदलने की मांग कर रहे हैं और उन्होंने हाल में इसे चुनौती भी दी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह दावा सही नहीं है कि केवल अमेरिका ही ऐसा देश है जहां जन्म के आधार पर नागरिकता मिलती है। कनाडा, मेक्सिको और ब्राजील सहित दुनिया के लगभग 36 देशों में इस प्रकार का कानून लागू है। ऐसे में इस मुद्दे पर ट्रंप के बयान को तथ्यात्मक रूप से भी विवादास्पद माना जा रहा है। सेवेज ने अपने पत्र में यह भी दावा किया कि कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में उच्च तकनीकी कंपनियों में अब श्वेत पुरुषों के लिए अवसर कम हो गए हैं और वहां भारतीय और चीनी मूल के लोगों का वर्चस्व बढ़ गया है। इस प्रकार के बयान को भी कई लोगों ने भेदभावपूर्ण और असत्य बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका में प्रवास, नागरिकता और रोजगार जैसे मुद्दे पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में इस तरह के बयान सामाजिक और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकते हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। भारत और चीन जैसे देशों के नागरिकों के बीच इस बयान को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर जुड़े इस दौर में नेताओं को अपने बयानों में संयम बरतने की आवश्यकता है। ट्रंप द्वारा साझा की गई इस टिप्पणी ने एक बार फिर प्रवास और नागरिकता से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह विवाद आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर क्या प्रभाव डालेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

You may have missed