‘टॉप सीक्रेट’ सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल की लिस्ट..जदयू के कई चमकदार चेहरे..भाजपा के कई सिटिंग भी..उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र की कुर्सी भी संशय में..
पटना। नीतीश कुमार की दसवीं सरकार के नये मंत्री अभी चैन से नये आवास पर प्रवेश भी नहीं कर पाये थे कि सड़क पर आ गये। 146वें दिन पर नीतीश कुमार ने दसवीं बार इस्तीफा दिया और सभी मंत्री भूतपूर्व हो गये। अब भाजपा कोटे से पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं. मंत्रिमंडल की विस्तार मई के प्रथम सप्ताह में तय मानी जा रही है.अभी भाजपा कोटे से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अलावे जदयू कोटे से बिजेंद्र यादव तथा विजय कुमार चौधरी उपमुख्यमंत्री हैं.ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा तथा जदयू साथ ही लोजपा (आर),हम तथा रालोमो से किसे मंत्री बनाया जाता है. इस प्रश्न का उत्तर रहस्य के आवरण में लिपटा हुआ है. नीतीश कुमार तो खुद अतीत हो गये, लेकिन उनके मंत्रियों का वर्तमान संशय में पड़ गया। वर्तमान विधान सभा में 60-62 विधायक भूतपूर्व मंत्री हैं। मतलब 25 फीसदी विधायक ‘भूतपूर्व मंत्री क्लब‘ के सदस्य हो गये हैं। स्वाभाविक रूप अधिकतर एनडीए वाले ही हैं। फिलहाल सरकार में 33 व्यक्तियों के लिए संभावना बची हुई और बीमार यानी मंत्री बनने की अपेक्षा रखने वाले व्यक्तियों की संख्या ढाई सौ के करीब है।5 मई के बाद बिहार में नयी सरकार का विस्तार. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष सुमन का हम कोटे से मंत्री बनना तय माना जा रहा है.क्योंकि उनकी पार्टी की बनावट कुछ इस प्रकार है कि जीतन राम मांझी का निर्णय ही आखिरी निर्णय होता है.लेकिन दूसरी तरफ रालोमो के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा, जिन्हें पूर्व सीएम नीतीश कुमार के साथ भाजपा ने राज्यसभा का सदस्य बनाया है,उनके पुत्र दीपक प्रकाश जो ना की विधायक है ना एमएलसी हैं, लेकिन नीतीश कुमार ने उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दिया था। उनका फिर से मंत्री बनना संशय के घेरे में है। सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल के अधिकांश सदस्यों को स्थान मिलता है कि इस पर फैसला होना भी अभी बाकी है.बताया जा रहा है कि भाजपा आलाकमान इस बार कई नए चेहरों को तरजीह देने जा रही है.वहीं दूसरी तरफ जदयू कोटे से भी बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है. मतलब नये मंत्रियों के नाम का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान करेंगे। राजनीतिक गलियारे में चर्चा के अनुसार, विधायक के टिकट की तरह मंत्री का पद भी बिकता है और राजनीतिक सौदे से तय होता है। इसका भी असर मंत्रियों के चयन में पड़ेगा।बिहार में अगले 10 दिन विधायकों के लिए काफी भारी पडेंगे। मंत्री बनने की इच्छा उफान मार रही है, लेकिन अपने हिस्से में कुछ नहीं है। पश्चिम बंगाल में पार्टी का प्रचार, नेताओं की वफादारी और नजदीक होने की कोशिश जारी रहेगी। सबसे बड़ा संकट उन विधायकों के सामने है, जो पिछली सरकार में मंत्री थे। कुछ तो पहली बार मंत्री बने थे और अभी डेढ़ सौ दिन भी पूरे नहीं हुए थे कि भूतपूर्व हो गये। यह भी विडंबना है कि कुछ नवनियुक्त मंत्री पूजा-हवन कर गृह प्रवेश कर रहे थे और उधर घर में ग्रह प्रवेश कर गया।


