बिहार में महंगाई भत्ता बढ़ाने की तैयारी, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिल सकती बड़ी राहत

  • 2 प्रतिशत वृद्धि पर विचार, सातवें वेतनमान के तहत महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत होने की संभावना
  • सरकार पर बढ़ेगा 1100 करोड़ का अतिरिक्त बोझ, केंद्र के पैटर्न पर फैसला संभव

पटना। बिहार में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल्द ही इस संबंध में बड़ा फैसला ले सकते हैं। जानकारी के अनुसार, सरकार महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत वृद्धि पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो सातवें वेतन आयोग के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा। वर्तमान में बिहार में सातवें वेतनमान के तहत कार्यरत कर्मचारियों को 1 जुलाई 2025 से 58 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। इससे पहले यह दर 55 प्रतिशत थी, जिसे अक्टूबर 2025 में 3 प्रतिशत बढ़ाया गया था। इस बढ़ोतरी का लाभ राज्य के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनधारकों को मिलने की उम्मीद है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस फैसले से कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और उन्हें महंगाई से कुछ राहत मिल सकेगी। हालांकि, इस प्रस्तावित वृद्धि का असर राज्य के वित्तीय ढांचे पर भी पड़ेगा। अनुमान है कि 2 प्रतिशत की वृद्धि लागू होने पर सरकार पर सालाना लगभग 1100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। इससे पहले जब महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी, तब राज्य के खजाने पर करीब 918 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा था। गौरतलब है कि केंद्र सरकार पहले ही अपने कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की वृद्धि कर चुकी है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। बिहार सरकार आमतौर पर केंद्र के फैसलों का अनुसरण करती है, इसलिए राज्य में भी इसी दिशा में निर्णय लिए जाने की संभावना प्रबल मानी जा रही है। वहीं, अन्य वेतन आयोगों के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की दर पहले से ही अधिक है। छठे वेतन आयोग के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों को 1 जुलाई 2025 से 257 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि पांचवें वेतन आयोग के तहत यह दर 474 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। महंगाई भत्ते में संशोधन आमतौर पर वर्ष में दो बार, जनवरी और जुलाई में किया जाता है। इसका निर्धारण अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर किया जाता है, जो महंगाई के स्तर को दर्शाता है। इसी सूचकांक के अनुसार सरकार महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी या संशोधन करती है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई भत्ते में वृद्धि कर्मचारियों के लिए राहत भरी होती है, लेकिन इससे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ता है। ऐसे में सरकार को संतुलन बनाते हुए निर्णय लेना होता है, ताकि कर्मचारियों को लाभ भी मिले और वित्तीय अनुशासन भी बना रहे। सरकार के इस संभावित फैसले से राज्य के लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही यह कदम कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने में भी सहायक साबित हो सकता है। बिहार सरकार द्वारा महंगाई भत्ता बढ़ाने की तैयारी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री के अंतिम निर्णय पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों को कब और कितना लाभ मिलेगा।

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