सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला, 200 से अधिक निलंबित राजस्व कर्मियों की बहाली

  • हड़ताल से प्रभावित कार्यों को पटरी पर लाने की पहल, जिलाधिकारियों को दिए निर्देश
  • ग्रेड पे और स्थानांतरण सहित मांगों को लेकर कर्मचारी थे आंदोलन पर

पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक फैसलों की रफ्तार तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्यभर में निलंबित किए गए 200 से अधिक राजस्व कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने इन कर्मचारियों का निलंबन रद्द करने का फैसला लिया है, जिससे लंबे समय से ठप पड़े राजस्व कार्यों के पटरी पर लौटने की उम्मीद बढ़ गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से इस संबंध में सभी जिलों के समाहर्ताओं को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विभाग के अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच जिन भी राजस्व कर्मचारियों को निलंबित किया गया था, उनका निलंबन तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। इस अवधि के दौरान कुल 224 कर्मचारियों को विभिन्न कारणों से निलंबित किया गया था। जानकारी के अनुसार, ये कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन पर थे। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ के बैनर तले 11 फरवरी से राजस्व कर्मियों ने अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश ले लिया था। इस हड़ताल के कारण अंचल स्तर पर भूमि से जुड़े कार्य जैसे दाखिल-खारिज, जमीन मापी और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई थीं। इसके अलावा जनगणना जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों पर भी इसका असर पड़ा था। प्रशासनिक कामकाज में आई इस बाधा को देखते हुए विभाग ने पहले सख्त रुख अपनाते हुए कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। लेकिन अब स्थिति को सामान्य करने और कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से सरकार ने निलंबन वापस लेने का निर्णय किया है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में ग्रेड वेतन में वृद्धि, गृह जिले में स्थानांतरण, दाखिल-खारिज प्रक्रिया को सरल बनाना और कार्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार शामिल है। इन मांगों को लेकर कर्मचारी लंबे समय से आंदोलनरत थे। वहीं, केवल राजस्व कर्मचारी ही नहीं, बल्कि अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी भी 9 मार्च से हड़ताल पर थे। विभाग द्वारा कई बार चेतावनी दिए जाने के बाद कुछ अधिकारी काम पर लौट आए, लेकिन अभी भी कई अधिकारी हड़ताल पर बने हुए हैं। विभाग ने पहले ही 45 से अधिक अधिकारियों को निलंबित किया था। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों में सकारात्मक संदेश जाएगा, बल्कि आम जनता को भी राहत मिलने की संभावना है। भूमि से जुड़े कार्यों के सुचारू संचालन से लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान में आसानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कर्मचारी जल्द काम पर लौटते हैं और सरकार उनकी मांगों पर विचार करती है, तो भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता है। साथ ही प्रशासनिक तंत्र को मजबूत करने के लिए संवाद और समन्वय जरूरी है। सरकार ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपने कार्यस्थलों पर लौटें और लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। विभाग की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि आगे कर्मचारियों की समस्याओं पर विचार किया जाएगा, ताकि स्थायी समाधान निकाला जा सके। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह निर्णय प्रशासनिक कार्यों को गति देने और कर्मचारियों के साथ संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके परिणाम राज्य के प्रशासनिक ढांचे पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

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