बिहार में जेलों पर सख्ती, सम्राट सरकार के निर्देश पर लगातार छापेमारी
- पटना के बेऊर जेल से मोबाइल बरामद, बाढ़ उपकारा में कुछ नहीं मिला
- अपराध नियंत्रण को लेकर राज्यभर में अभियान तेज, सुरक्षा व्यवस्था की हो रही सघन जांच
पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही प्रशासनिक सक्रियता बढ़ती हुई नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पिछले दो दिनों से राज्य के विभिन्न जिलों के जेलों में सघन छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। शनिवार को राजधानी पटना के बेऊर जेल और बाढ़ मंडल उपकारा में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बेऊर जेल से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया, जो जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। वहीं बाढ़ उपकारा में की गई तलाशी के दौरान कोई भी आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, जिससे वहां की सुरक्षा व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। जानकारी के अनुसार, शनिवार की सुबह बाढ़ अनुमंडल स्थित उपकारा में यह छापेमारी की गई। इस अभियान में अनुमंडल पदाधिकारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस बल शामिल रही। टीम ने जेल परिसर के सभी वार्डों, जिसमें महिला वार्ड भी शामिल है, की गहन तलाशी ली। उस समय अधिकांश बंदी अपने-अपने हाजत में सो रहे थे, जिसके बावजूद प्रत्येक वार्ड की बारीकी से जांच की गई। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रामकृष्ण ने बताया कि यह कार्रवाई नियमित जांच प्रक्रिया के तहत की गई थी और इसका उद्देश्य जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि छापेमारी के दौरान किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, जिससे यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू है। इससे पहले शुक्रवार को भी राज्य के कई जिलों में इसी प्रकार की कार्रवाई की गई थी। मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, भागलपुर, सीतामढ़ी और सीवान सहित कई स्थानों के जेलों में छापेमारी कर सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई थी। इन कार्रवाइयों का मुख्य उद्देश्य जेलों के अंदर अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और बंदियों द्वारा बाहरी दुनिया से संपर्क के अवैध साधनों को समाप्त करना है। प्रशासन का मानना है कि जेलों में मोबाइल फोन या अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की मौजूदगी से अपराध संचालन की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में समय-समय पर इस प्रकार की औचक छापेमारी बेहद आवश्यक है। इसी कारण अब इस अभियान को और तेज करने की योजना बनाई जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में भी राज्य के अन्य जेलों में इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। इससे न केवल जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि बंदियों के बीच अनुशासन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार द्वारा शुरू किया गया यह अभियान कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे अपराधियों के हौसले पर अंकुश लगेगा और राज्य में सुरक्षा का माहौल बेहतर होगा। बिहार में जेलों के अंदर चल रहे इस विशेष अभियान ने यह संकेत दिया है कि सरकार अपराध और अवैध गतिविधियों के प्रति सख्त रुख अपनाने के मूड में है। लगातार हो रही छापेमारी से यह स्पष्ट है कि प्रशासन अब किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त करने के पक्ष में नहीं है और कानून व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सक्रिय है।


