मुख्यमंत्री बनते ही एक्शन में सम्राट चौधरी, शिक्षक भर्ती और जन संवाद पर जोर, शुरू होगा जनता दरबार
- शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण की तैयारी तेज, 20 अप्रैल तक अधिसूचना और सितंबर में परीक्षा प्रस्तावित, विभागीय समीक्षा और जनहित मुद्दों पर फोकस
पटना। बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पदभार संभालते ही सक्रिय मोड में नजर आ रहे हैं। सरकार के गठन के तुरंत बाद ही उन्होंने प्रशासनिक और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की दिशा में काम शुरू कर दिया है। सबसे पहले शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा के इस चरण की अधिसूचना 20 अप्रैल तक जारी किए जाने की तैयारी है। आयोग के अनुसार, परीक्षा का आयोजन 22 से 27 सितंबर के बीच किया जाएगा। इस फैसले को राज्य के लाखों अभ्यर्थियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, जो लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जनसंपर्क को प्राथमिकता देते हुए अपने देशरत्न मार्ग स्थित आवास पर जनता दरबार लगाने की घोषणा की है। इस पहल के तहत वे सीधे आम लोगों की समस्याएं सुनेंगे और उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई करेंगे। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इसी तरह जनता दरबार के माध्यम से लोगों की शिकायतों का मौके पर समाधान करते रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने कार्यकाल की शुरुआत सामाजिक और प्रशासनिक गतिविधियों के साथ की है। वे पटना के जेपी गंगा पथ पर आयोजित नारी शक्ति वंदन अभियान में शामिल हुए, जहां उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के संदेश को आगे बढ़ाया। इस अवसर पर महिलाओं ने उनका स्वागत किया और कार्यक्रम को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। सरकार के कामकाज को गति देने के लिए मुख्यमंत्री लगातार विभागीय समीक्षा बैठकों का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने नगर विकास विभाग के कार्यों की विशेष रूप से समीक्षा की और विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिवालय का निरीक्षण भी किया और वहां की कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के कार्य करने के तरीके का भी अवलोकन किया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के संकेत मिलते हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री पटना साहिब गुरुद्वारा भी पहुंचे, जहां उन्होंने माथा टेका और दरबार में हाजिरी लगाई। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने उनका पारंपरिक सम्मान किया। यह दौरा सामाजिक समरसता और धार्मिक आस्था के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक स्तर पर इस बदलाव को लेकर प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री के चयन को लेकर सवाल उठाए हैं और सोशल मीडिया पर अपनी राय व्यक्त की है। वहीं, सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए समर्थन किया है। नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य में शराबबंदी नीति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ जनप्रतिनिधियों ने इस नीति की समीक्षा की मांग उठाई है और राजस्व हानि का मुद्दा सामने रखा है। हालांकि सरकार की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का शुरुआती कदम यह संकेत देता है कि वे प्रशासनिक सक्रियता और जनसंपर्क दोनों पर समान रूप से ध्यान दे रहे हैं। शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को गति देना और जनता दरबार शुरू करना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही शासन-प्रशासन में तेजी और सक्रियता देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शुरुआती फैसले यह दर्शाते हैं कि वे विकास, रोजगार और जनसुनवाई को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं। आने वाले समय में इन पहलों का असर राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।


