महिला आयोग में सास-बहू विवाद का मामला, आरोप-प्रत्यारोप के बीच समझौते से सुलझा विवाद
- बहू ने मारपीट और गर्भपात का लगाया आरोप, सास ने संपत्ति विवाद और धमकी की कही बात
- आयोग की पहल पर दोनों पक्षों में समझौता, साथ रहने पर बनी सहमति
पटना। बिहार राज्य महिला आयोग में सास-बहू के बीच विवाद का एक संवेदनशील मामला सामने आया, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि आयोग के हस्तक्षेप और समझाइश के बाद यह मामला आपसी सहमति से सुलझ गया और दोनों पक्ष साथ रहने को तैयार हो गए। मामला पटना का है, जहां एक बहू ने आरोप लगाया कि उसकी सास और उसकी परिचित महिला मिलकर उसे प्रताड़ित करती थीं। बहू के अनुसार, उसे बार-बार शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया गया, जिससे उसकी स्थिति काफी बिगड़ गई। उसने यह भी दावा किया कि मारपीट के कारण उसका गर्भपात हो गया। बहू ने अपनी शिकायत में बताया कि सास उसके कपड़ों और व्यवहार को लेकर टिप्पणी करती थी और सामाजिक परंपराओं का पालन न करने पर उसे ताने देती थी। उसने यह भी आरोप लगाया कि सास अपने बेटे को उसके साथ रहने से रोकती थी और दोनों के वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करती थी। बहू के मुताबिक, सास का डर था कि यदि बेटा पत्नी के साथ रहेगा तो संतान होने पर संपत्ति पर उसका अधिकार बढ़ जाएगा। दूसरी ओर, सास ने भी आयोग में आवेदन देकर बहू और उसके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए। सास का कहना था कि शादी के बाद से ही बहू घर में झगड़ा करती थी और उसके मायके वाले भी बार-बार आकर विवाद को बढ़ाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बहू और उसके परिवार वाले संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से दबाव बनाते थे और धमकी देते थे। सास ने यह भी कहा कि जिस मकान में वे रह रही हैं, वह उन्होंने अपने पति की संपत्ति पर ऋण लेकर बनवाया है और उसी से उनकी आजीविका चलती है। उनके अनुसार, बहू बार-बार फ्लैट की मांग करती थी और प्रताड़ना के झूठे आरोप लगाकर उन्हें परेशान करती थी। सास ने यह भी आरोप लगाया कि बहू ने घर में लगाए गए निगरानी कैमरे के तार तक काट दिए। दोनों पक्षों के आरोपों के बीच मामला और उलझता जा रहा था। इस दौरान स्थानीय थाने में भी समझौता कराने का प्रयास किया गया था, जहां दोनों को अलग-अलग मंजिल पर रहने की सलाह दी गई थी। इसके बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था और मामला महिला आयोग तक पहुंच गया। महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो. अप्सरा ने बताया कि दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद आयोग ने उन्हें आपसी संवाद और समझदारी से विवाद सुलझाने की सलाह दी। आयोग ने उन्हें कुछ दिनों तक शांतिपूर्वक साथ रहने और रिश्ते को सुधारने का मौका देने का सुझाव दिया। आयोग के निर्देश के बाद दोनों पक्ष गुरुवार को फिर उपस्थित हुए और सास ने अपना आवेदन वापस ले लिया। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने का निर्णय लिया और साथ रहने पर सहमति जताई। आयोग ने इस मामले को निष्पादित घोषित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक विवादों में संवाद और समझदारी से समाधान निकालना सबसे प्रभावी तरीका होता है। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई से पहले आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास रिश्तों को बचाने में मददगार साबित हो सकता है। यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि पारिवारिक विवाद कई बार गलतफहमियों और संवाद की कमी के कारण बढ़ जाते हैं। समय रहते यदि दोनों पक्ष धैर्य और समझदारी से काम लें, तो ऐसे विवादों का समाधान संभव है। महिला आयोग के हस्तक्षेप से यह विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ गया और दोनों पक्षों ने एक नई शुरुआत करने का फैसला लिया है।


