पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की तैयारी तेज, 140 उम्मीदवारों के नाम लगभग तय
- दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक, प्रधानमंत्री आवास पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा
- पुराने नेताओं और संगठन के कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता, जल्द जारी हो सकती है पहली सूची
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राजधानी दिल्ली में पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन पर विस्तृत चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार इस बैठक में लगभग 140 उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही पार्टी की पहली सूची जारी की जा सकती है। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास सात लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई। सामान्यतः इस प्रकार की बैठकें भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में होती हैं, लेकिन इस बार विशेष रणनीतिक महत्व के कारण प्रधानमंत्री आवास को बैठक स्थल के रूप में चुना गया। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद केंद्रीय चुनाव समिति की यह पहली बैठक थी, इसलिए इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा लगभग आधी सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर सहमति बना चुकी है। पार्टी का प्रयास है कि वह अन्य दलों से पहले उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुनावी बढ़त हासिल करे। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग अप्रैल के अंतिम सप्ताह में राज्य में चुनाव की घोषणा कर सकता है। सूत्रों के अनुसार पार्टी इस बार उम्मीदवार चयन में कई नए रणनीतिक बदलाव कर रही है। पिछली बार के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार वर्तमान सांसदों को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा। इसके अलावा कुछ पूर्व सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने की योजना भी बनाई जा रही है। संभावित उम्मीदवारों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक और नेता शुभेंदु अधिकारी के नामों की चर्चा हो रही है। हालांकि पार्टी ने आधिकारिक रूप से उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार उम्मीदवार चयन में एक और रणनीतिक बदलाव किया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार फिल्मी कलाकारों या अन्य दलों से आए नेताओं को टिकट देने से परहेज किया जाएगा। इसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि ऐसे कई नेता चुनाव जीतने के बाद फिर से दूसरे दलों में शामिल हो जाते हैं या राजनीतिक सक्रियता कम कर देते हैं। दरअसल वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कई ऐसे नेताओं को टिकट दिया था जो बाद में पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में चले गए। इस अनुभव से सबक लेते हुए इस बार पार्टी अपने पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति अपना रही है। इससे पार्टी संगठन के कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा और संगठनात्मक मजबूती भी मिलेगी। पार्टी के अनुसार उम्मीदवारों के चयन में जीतने की संभावना, संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक समीकरण और पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता जैसे कई कारकों को ध्यान में रखा जा रहा है। गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटों पर जीत हासिल कर राज्य में मुख्य विपक्षी दल का स्थान प्राप्त किया था। हालांकि बाद में कुछ विधायकों के पार्टी छोड़ने के कारण वर्तमान में पार्टी के पास लगभग 65 विधायक ही बचे हैं। इस बीच भाजपा ने राज्य में चुनाव प्रचार अभियान भी तेज कर दिया है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में आयोजित एक रैली में वादा किया था कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होने के बाद पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल और भी तेज हो जाएगा।


