पीएमसीएच गर्ल्स हॉस्टल में कमरों के पुनः आवंटन पर विवाद, पीजी-यूजी छात्राओं ने स्वास्थ्य सचिव से लगाई गुहार
पटना। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के गर्ल्स हॉस्टल में कमरों के आवंटन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। दस मंजिला इस छात्रावास में कुल 560 कमरे हैं, जिनमें अब तक 280 कमरे स्नातकोत्तर छात्राओं और 280 कमरे स्नातक छात्राओं को आवंटित थे। हाल ही में प्रशासन द्वारा आवंटन व्यवस्था में बदलाव की सूचना जारी किए जाने के बाद दोनों वर्गों की छात्राओं में असंतोष फैल गया है। छात्राओं का आरोप है कि नई व्यवस्था के तहत कमरों का पुनः आवंटन किया जा रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई और शोध कार्य प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि बिना किसी स्पष्ट नीति, लिखित आदेश या पूर्व सूचना के कमरों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो न केवल अनुचित है बल्कि शैक्षणिक दृष्टि से भी नुकसानदायक है। विशेष रूप से स्नातकोत्तर छात्राओं ने चिंता जताई है कि परीक्षा और शोध प्रबंध जमा करने के इस महत्वपूर्ण दौर में कमरा बदलने का दबाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। स्नातकोत्तर छात्राओं का कहना है कि वे लंबे समय से अपने-अपने कमरों में रहकर शोध और अध्ययन कार्य कर रही हैं। कई छात्राएं शोध कार्य में संलग्न हैं, जिनके लिए स्थिर और शांत वातावरण अत्यंत आवश्यक है। अचानक कमरा बदलने की स्थिति में अध्ययन सामग्री, पुस्तकें और अन्य आवश्यक संसाधनों को स्थानांतरित करना उनके लिए कठिन हो जाएगा। उनका यह भी कहना है कि शोध और प्रबंध लेखन जैसे गंभीर कार्यों के दौरान बार-बार व्यवधान से उनकी शैक्षणिक प्रगति प्रभावित हो सकती है। इस मुद्दे को लेकर छात्राओं ने कॉलेज के प्राचार्य नरेंद्र प्रताप सिंह से कई बार मुलाकात की और अपनी चिंताएं व्यक्त कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। छात्राओं के अनुसार, प्रशासन की ओर से न तो कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किया गया है और न ही पारदर्शी नीति की जानकारी दी गई है। इससे छात्राओं के बीच असमंजस और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को स्नातकोत्तर और स्नातक छात्राओं का एक प्रतिनिधिमंडल बिहार सरकार के स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार से मिला। छात्राओं ने उन्हें लिखित शिकायत सौंपते हुए हस्तक्षेप की मांग की। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब तक छात्रावास आवंटन को लेकर स्पष्ट, पारदर्शी और सर्वसम्मत नीति नहीं बनाई जाती, तब तक वर्तमान व्यवस्था को यथावत रखा जाए। छात्राओं का कहना है कि छात्रावास केवल रहने का स्थान नहीं है, बल्कि यह उनकी पढ़ाई, सुरक्षा और मानसिक स्थिरता से जुड़ा संवेदनशील विषय है। ऐसे में किसी भी बदलाव से पहले सभी हितधारकों, जिनमें स्नातकोत्तर और स्नातक छात्राएं, प्रशासन और संकाय सदस्य शामिल हों, के साथ बैठक कर सहमति बनाना आवश्यक है। उनका आरोप है कि अचानक लिए गए निर्णय से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और छात्राओं में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासन छात्रावास व्यवस्था को संतुलित और सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से बदलाव की तैयारी में है, लेकिन इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसी कारण छात्राओं के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। छात्राओं ने यह भी मांग की है कि यदि किसी भी प्रकार का भेदभावपूर्ण व्यवहार हुआ है या प्राचार्य द्वारा कोई आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है, तो उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और शैक्षणिक भविष्य की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। इस मामले में दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम ने प्राचार्य नरेंद्र प्रताप सिंह से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया, लेकिन इस संबंध में कोई उत्तर प्राप्त नहीं हो सका। फिलहाल छात्राएं प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही हैं। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो आगे आंदोलन की रणनीति पर विचार किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। पीएमसीएच गर्ल्स हॉस्टल का यह विवाद अब गंभीर रूप लेता दिख रहा है और छात्राओं का असंतोष खुलकर सामने आ चुका है।


