चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, मां भारती के वीर सपूत को किया नमन
नई दिल्ली। महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि भारत माता के इस वीर सपूत का बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश साझा कर आजाद के अदम्य साहस और त्याग को नमन किया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आजाद जैसे वीर सेनानियों की बदौलत ही देश को स्वतंत्रता मिली।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी किया स्मरण
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बलिदान दिवस पर चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि दुश्मन की गोलियों का सामना करने वाले इस महान क्रांतिकारी का त्याग और तेजस्वी व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में आजाद की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका संकल्प और आत्मबल देशवासियों के लिए सदैव मार्गदर्शक रहेगा।
अन्य नेताओं ने भी दी श्रद्धांजलि
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि मां भारती के इस अमर सपूत के ओजस्वी विचार और तेजस्वी जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना जगाते रहेंगे। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि मातृभूमि का कण-कण इस वीर क्रांतिकारी का सदैव ऋणी रहेगा। विभिन्न राज्यों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने स्तर पर आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अल्फ्रेड पार्क की ऐतिहासिक घटना
27 फरवरी 1931 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन इलाहाबाद, जिसे अब प्रयागराज के नाम से जाना जाता है, स्थित अल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर आजाद का ब्रिटिश पुलिस से सामना हुआ था। घेराबंदी के बावजूद उन्होंने बहादुरी से मुकाबला किया। जब उनके पास गोलियां कम पड़ने लगीं, तो उन्होंने अंग्रेजों के हाथों पकड़े जाने के बजाय अंतिम गोली स्वयं को मारकर अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी इसी अदम्य भावना और आत्मसम्मान ने उन्हें अमर बना दिया। आज उसी पार्क का नाम चंद्रशेखर आजाद पार्क रखा गया है।
बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है 27 फरवरी
देशभर में 27 फरवरी को चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाएं, संगोष्ठियां और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में भी उनके जीवन और योगदान पर प्रकाश डाला जाता है। इतिहासकारों का मानना है कि आजाद का जीवन युवाओं के लिए साहस, देशभक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कम उम्र में ही क्रांतिकारी मार्ग चुना और अंत तक अपने संकल्प पर अडिग रहे।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
चंद्रशेखर आजाद हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वे भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संगठित संघर्ष में शामिल रहे। उनका उद्देश्य भारत को विदेशी शासन से मुक्त कराना था। उन्होंने अनेक क्रांतिकारी गतिविधियों का नेतृत्व किया और युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उनका नाम आज भी देशभक्ति और वीरता का पर्याय माना जाता है।
राष्ट्र की प्रेरणा बने रहेंगे आजाद
प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं के संदेशों में एक स्वर था कि चंद्रशेखर आजाद का बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका जीवन यह संदेश देता है कि मातृभूमि की रक्षा और स्वतंत्रता के लिए किसी भी त्याग से पीछे नहीं हटना चाहिए। आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बाद भी उनका साहस और समर्पण देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राष्ट्र उनके बलिदान को कृतज्ञता के साथ स्मरण करता है और आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दिलाता है।


