February 27, 2026

पटना हाईकोर्ट में जल्द होगी 9 जजों की नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट ने की सिफारिश, लंबित मामलों को मिलेगी राहत

पटना। पटना उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। उच्चतम न्यायालय की नियुक्ति समिति प्रणाली ने पटना उच्च न्यायालय में नौ नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश की है। इस संबंध में गुरुवार को आयोजित बैठक में प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया और संबंधित नामों को स्वीकृति प्रदान की गई। अब इन नामों को आगे की प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, नियुक्ति समिति प्रणाली की बैठक में जिन अधिवक्ताओं के नामों पर मंथन किया गया, उनमें मो. नदीम सेराज, रंजन कुमार झा, कुमार मनीष, संजीव कुमार, गिरिजीश कुमार, आलोक कुमार, राज कुमार, राणा विक्रम सिंह और विकाश कुमार शामिल हैं। समिति द्वारा इन नामों की अनुशंसा किए जाने के बाद अब अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। नियुक्ति की प्रक्रिया के तहत नियुक्ति समिति प्रणाली द्वारा अनुशंसित नामों को पहले केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाती है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया पूर्ण मानी जाती है और संबंधित अधिवक्ता न्यायाधीश पद की शपथ ग्रहण करते हैं। वर्तमान में पटना उच्च न्यायालय में कुल 53 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं, जबकि कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 38 है। इस वर्ष तीन न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने की संभावना है, जिनमें मुख्य न्यायाधीश एस. के. साहू भी शामिल हैं। ऐसे में स्वीकृत पदों और कार्यरत न्यायाधीशों के बीच का अंतर और बढ़ सकता है। यदि नौ नए न्यायाधीशों की नियुक्ति होती है, तो निश्चित रूप से न्यायालय की कार्यक्षमता में सुधार आएगा, लेकिन इसके बावजूद कई पद रिक्त ही रहेंगे। पटना उच्च न्यायालय लंबे समय से न्यायाधीशों की कमी की समस्या से जूझ रहा है। इसका सीधा असर न्यायिक कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। स्वीकृत पदों की तुलना में लगभग आधी संख्या में ही न्यायाधीश कार्यरत हैं, जिसके कारण मामलों की सुनवाई में देरी हो रही है। लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालयों में न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या न होना न्याय प्रणाली के लिए गंभीर चुनौती है। कानूनी हलकों में यह उम्मीद जताई जा रही है कि नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों के निपटारे की गति तेज होगी और लंबित मामलों में कुछ राहत मिलेगी। विशेष रूप से दीवानी, फौजदारी और संवैधानिक मामलों की सुनवाई में तेजी आने की संभावना है। इससे आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय मिलने की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखा जा सकेगा। गौरतलब है कि न्यायपालिका में नियुक्ति समिति प्रणाली के माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस प्रणाली के तहत उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश मिलकर विभिन्न उच्च न्यायालयों के लिए नामों पर विचार करते हैं और उपयुक्त उम्मीदवारों की सिफारिश करते हैं। इसका उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता और पारदर्शिता को बनाए रखना है। पटना उच्च न्यायालय में प्रस्तावित नियुक्तियां ऐसे समय में हो रही हैं जब न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। यदि केंद्र सरकार और राष्ट्रपति की स्वीकृति शीघ्र मिलती है, तो आने वाले समय में न्यायालय के कार्य में तेजी और पारदर्शिता दोनों देखने को मिल सकती हैं। न्यायालय परिसर और अधिवक्ता समुदाय में इस निर्णय को सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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