आज दिल्ली दौरे पर रवाना होंगे सीएम नीतीश, उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार से करेंगे मुलाकात, पीएम से होगी चर्चा
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अचानक दिल्ली के दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस दौरे को सामान्य नहीं माना जा रहा, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम समझा जा रहा है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार दिल्ली में उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार से मुलाकात करेंगे और इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा के शीर्ष नेताओं से भी विचार-विमर्श करेंगे। भारत में इस साल उपराष्ट्रपति चुनाव होना तय है। ऐसे में राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ना स्वाभाविक है। नीतीश कुमार की इस यात्रा को उपराष्ट्रपति चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की सहयोगी पार्टी है और स्वाभाविक है कि उम्मीदवार चयन और समर्थन जैसे मुद्दों पर नीतीश कुमार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। नीतीश कुमार की मुलाकात सिर्फ उपराष्ट्रपति चुनाव तक सीमित नहीं रहेगी। इसे राष्ट्रपति चुनाव और बिहार की भविष्य की राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है। दरअसल, 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और उससे पहले भाजपा और जेडीयू के बीच गठबंधन और सीटों के बंटवारे का सवाल उठना तय है। यही कारण है कि इस दौरे को दोनों दलों के बीच भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने की एक कोशिश भी माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भाजपा और जेडीयू के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। नीतीश कुमार ने कई बार अपने फैसलों से भाजपा को चौंकाया है और कई मौकों पर दूरी भी बनाई है। हालांकि सत्ता में बने रहने और प्रदेश की राजनीति को संतुलित करने के लिए दोनों दलों का साथ आना आवश्यक दिखता है। यही वजह है कि इस बार बातचीत के जरिए रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।नीतीश कुमार की राजनीतिक शैली हमेशा संतुलन और मौके की नब्ज पकड़ने वाली रही है। वे विपक्ष और सत्ता, दोनों पक्षों से संवाद बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। दिल्ली यात्रा इसी प्रवृत्ति का हिस्सा प्रतीत होती है। यदि वे उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार से मिलते हैं और भाजपा नेतृत्व से विस्तार से चर्चा करते हैं, तो इससे यह संदेश जाएगा कि जेडीयू राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से बिहार की राजनीति में भी बड़ा संकेत जाएगा। एक तरफ यह गठबंधन की मजबूती का प्रतीक होगा, वहीं दूसरी ओर जेडीयू को भाजपा के साथ अपने हिस्से और पहचान को मजबूत करने का मौका भी मिलेगा। चुनाव से पहले यदि दोनों दल रणनीतिक रूप से एकजुट हो जाते हैं, तो यह विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इस तरह, नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि आने वाले महीनों की राजनीतिक दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।


