नालंदा में डिप्रेशन में आए युवक ने की आत्महत्या, पत्नी से झगड़ा के बाद खुद को मारी गोली
नालंदा। जिले के चिकसौरा थाना क्षेत्र के शाहबाजपुर गांव में सोमवार की रात एक दर्दनाक घटना घटी। यहां श्रीकांत नामक युवक ने अपने ही सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान रामजी प्रसाद यादव के पुत्र श्रीकांत के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि युवक पिछले कुछ दिनों से गहरे डिप्रेशन की स्थिति में था और मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। घटना के बारे में जानकारी मिली है कि सोमवार की रात श्रीकांत ने परिवार के साथ सामान्य ढंग से खाना खाया। इसके बाद अचानक उसने आत्मघाती कदम उठाते हुए खुद को गोली मार ली। गोली लगने से उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। परिवारजन उस समय स्तब्ध रह गए और किसी को समझ नहीं आया कि यह सब इतना अचानक कैसे हो गया। सूत्रों के अनुसार, श्रीकांत की पत्नी के साथ उसका संबंध पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण चल रहा था। गांव में चर्चा है कि युवक का किसी युवती से प्रेम संबंध था, जिसे लेकर दंपत्ति के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। शादी उसकी पटना जिले के मसौढ़ी में हुई थी। घरेलू कलह और मानसिक तनाव के कारण ही युवक डिप्रेशन की चपेट में आ गया था। घटना की सूचना मिलते ही चिकसौरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ मॉडल अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस को मौके पर हथियार नहीं मिला है। माना जा रहा है कि किसी ने हथियार को गायब कर दिया है। इस पहलू पर भी पुलिस जांच कर रही है। थानाध्यक्ष रविंद्र कुमार ने बताया कि परिवार के लोगों से पूछताछ की जा रही है, लेकिन अभी तक किसी ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच सभी संभावित बिंदुओं पर कर रही है। परिवार के लोगों ने यह स्वीकार किया कि श्रीकांत लंबे समय से डिप्रेशन की समस्या से गुजर रहा था। अक्सर वह खुद में गुम और चुपचाप रहता था। ऐसे हालात में पत्नी से लगातार हो रहे झगड़े ने उसके मानसिक संतुलन को और बिगाड़ दिया। अंततः उसने इस त्रासदपूर्ण कदम को उठा लिया। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर संदेश भी देती है। आजकल डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं या शर्म और संकोच के कारण खुलकर चर्चा नहीं करते। परिणामस्वरूप व्यक्ति भीतर ही भीतर टूटने लगता है और अंत में आत्महत्या जैसी स्थिति आ जाती है। नालंदा की यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व देना चाहिए। परिवार और समाज को ऐसे व्यक्ति के साथ संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए जो मानसिक तनाव से गुजर रहा हो। समय रहते यदि उसकी मनोदशा को समझा जाता और उसे उचित परामर्श या सहारा मिलता, तो शायद यह घटना टल सकती थी।


