पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा बीजेपी में होंगे शामिल, कल लेंगे पार्टी की सदस्यता

पटना। बिहार की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले लगातार बड़े उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। कई नेता एक दल छोड़कर दूसरे दल का दामन थाम रहे हैं। इसी कड़ी में अब खबर है कि पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने जा रहे हैं। यह कदम जन सुराज पार्टी और उसके संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।आनंद मिश्रा असम कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। अपनी सख्त कार्यशैली और तेजतर्रार छवि के कारण लोग उन्हें “असम का सिंघम” भी कहते हैं। पुलिस सेवा में रहते हुए उन्होंने कई बार अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की, जिससे वे जनता के बीच लोकप्रिय हुए। हालांकि, बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर राजनीति का रास्ता चुना। राजनीति में आने के बाद मिश्रा ने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज से जुड़ाव किया। वहां उन्हें युवाओं की कमान सौंपी गई और वे यूथ विंग के अध्यक्ष बने। उनकी छवि ईमानदार और जमीनी नेता की रही, जिसने जन सुराज को स्थानीय स्तर पर ऊर्जा दी। लेकिन अब अचानक उनका पार्टी छोड़ देना पीके के लिए एक गंभीर झटका है। सूत्रों के मुताबिक, आनंद मिश्रा 19 अगस्त को सुबह 11 बजे पटना स्थित भाजपा कार्यालय में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। भाजपा के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में उनकी एंट्री को खास महत्व दिया जा रहा है। चर्चा है कि पार्टी उन्हें बक्सर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बना सकती है। बक्सर सीट पर उनकी संभावित दावेदारी को लेकर सियासी हलकों में पहले से ही कयास लगाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान भी आनंद मिश्रा ने भाजपा से टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन उस समय पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया। टिकट न मिलने पर उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में उनकी एंट्री बक्सर के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भाजपा उन्हें मैदान में उतारकर दो फायदे हासिल करना चाहेगी। पहला – वे एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं जिनकी छवि साफ-सुथरी और सख्त प्रशासनिक रही है, जिससे जनता का विश्वास उन पर आसानी से बन सकता है। दूसरा – उनके आने से युवा वोटरों को साधने में पार्टी को मदद मिलेगी, क्योंकि जन सुराज में रहते हुए वे युवाओं के बीच खासे सक्रिय रहे थे। कुल मिलाकर, आनंद मिश्रा का भाजपा में शामिल होना न सिर्फ बक्सर बल्कि पूरे बिहार की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में उनकी भूमिका क्या रहती है और प्रशांत किशोर उनकी इस विदाई को कैसे संभालते हैं।

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