पटना में एसटीईटी अभ्यार्थियों ने निकाला विरोध मार्च, परीक्षा नहीं तो वोट नहीं के लगाए नारे
पटना। बिहार में लंबित एसटीईटी (स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। सोमवार को राजधानी पटना कॉलेज परिसर से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकत्र होकर विरोध मार्च पर निकले। नाराज अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास की ओर पैदल मार्च करने की घोषणा की। इस दौरान अभ्यर्थियों ने “एसटीईटी नहीं तो वोट नहीं” जैसे नारों के जरिए आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार को सबक सिखाने की चेतावनी भी दी। अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से एसटीईटी परीक्षा का आयोजन नहीं हो रहा है। सरकार बार-बार केवल आश्वासन देती है, लेकिन परीक्षा की आधिकारिक घोषणा नहीं करती। इस कारण लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी उम्र निकल रही है और बेरोजगारी की मार झेलनी पड़ रही है। यही कारण है कि छात्र-युवा अब सड़क पर उतरकर सरकार से सीधा सवाल पूछ रहे हैं। विरोध मार्च में शामिल छात्रों ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर परीक्षा टाल रही है। एक अभ्यर्थी ने कहा, “दो साल से सरकार हमें केवल झूठे वादे कर रही है। हर बार कहा जाता है कि जल्द ही एसटीईटी परीक्षा होगी, लेकिन कभी कोई तिथि घोषित नहीं की जाती। अब हमें विश्वास नहीं रहा।” दूसरे छात्र ने कहा, “हमने ठान लिया है कि जब तक परीक्षा की तारीख का आधिकारिक ऐलान नहीं होता, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। यह पहला मौका नहीं है जब एसटीईटी अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया हो। इससे पहले भी छात्रों ने पटना की सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया था। उस समय पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था, जिसके बाद मामला गरमाया था। बाद में छात्र नेताओं और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई थी, लेकिन उस वार्ता से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अब सरकार की किसी भी आश्वासन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। वे केवल परीक्षा की तिथि और प्रक्रिया की आधिकारिक अधिसूचना चाहते हैं। बिहार में विधानसभा चुनाव का माहौल बनने लगा है। ऐसे में छात्रों का यह आंदोलन सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। अभ्यर्थियों का नारा “परीक्षा नहीं तो वोट नहीं” स्पष्ट संकेत देता है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो इसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर भी पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य का मुद्दा चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है। यदि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं निकाला तो नाराज युवा वर्ग विपक्ष के हाथ मजबूत कर सकता है। छात्रों के मार्च को देखते हुए पटना जिला प्रशासन और पुलिस अलर्ट पर है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने वाले मार्च को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। प्रशासन की ओर से फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठनों ने साफ किया है कि यह आंदोलन सिर्फ आज तक सीमित नहीं रहेगा। जब तक एसटीईटी परीक्षा की घोषणा नहीं हो जाती, वे पटना सहित पूरे बिहार में आंदोलन को तेज करेंगे। उनका कहना है कि यह केवल रोजगार का नहीं बल्कि सम्मान और भविष्य की लड़ाई है। पटना में सोमवार को निकाले गए इस विरोध मार्च ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि एसटीईटी परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में गहरी नाराजगी है। लंबे समय से लटकी परीक्षा ने युवाओं के धैर्य की सीमा तोड़ दी है। अब वे सीधे तौर पर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं। “एसटीईटी नहीं तो वोट नहीं” का नारा यह दर्शाता है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा सत्ता पक्ष के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता हैं।


