February 25, 2026

पटना एम्स के डॉक्टरों ने हड़ताल का किया ऐलान, सभी कार्य बंद, विधायक से की माफी मांगने की मांग

पटना। पटना स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने सुरक्षा और सम्मान की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार कर दिया है। यह कदम उस घटना के विरोध में उठाया गया है, जिसमें शिवहर के विधायक चेतन आनंद, उनकी पत्नी डॉ. आयुषी सिंह और उनके सुरक्षाकर्मियों पर डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों के साथ मारपीट, धमकी और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा है।
अस्पताल परिसर में हुआ हंगामा
रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा दिए गए लिखित आवेदन में कहा गया है कि बुधवार की देर रात चेतन आनंद, उनकी पत्नी और उनके सशस्त्र गार्ड जबरन एम्स परिसर में घुस आए। उन्होंने वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट की और एक गार्ड को हथियार के बट से गंभीर रूप से घायल कर दिया। साथ ही रेजिडेंट डॉक्टरों को गालियां दी गईं, धमकियां दी गईं और उनके साथ डर का माहौल बनाया गया।
सुरक्षा के अभाव में उत्पन्न हुआ भय का वातावरण
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी घटनाएं उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। आवेदन में लिखा गया है कि इस हमले के बावजूद एम्स प्रशासन की ओर से कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के बीच भारी निराशा और लाचारी की भावना व्याप्त हो गई है।
रेजिडेंट डॉक्टरों ने की सामूहिक मांग
रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने इस घटना के विरोध में सामूहिक रूप से हड़ताल का ऐलान किया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही अस्पताल परिसर में स्थायी और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। डॉक्टरों ने यह भी कहा है कि जब तक प्रशासन इस घटना की औपचारिक सार्वजनिक निंदा नहीं करता और डॉक्टरों को सुरक्षा का लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक सेवाएं बहाल नहीं की जाएंगी।
‘विधायक माफी मांगो’ जैसे नारों के साथ प्रदर्शन
गुरुवार को एम्स परिसर में डॉक्टरों ने मार्च करते हुए विरोध जताया। “विधायक माफी मांगो” और “वी वांट जस्टिस” जैसे नारों के साथ उन्होंने अपना रोष व्यक्त किया। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया गया, लेकिन संदेश स्पष्ट था कि अब डॉक्टर किसी भी प्रकार के अपमान या हिंसा को सहन नहीं करेंगे।
सेवाएं ठप, मरीजों की बढ़ी परेशानी
डॉक्टरों की इस हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ा है। ओपीडी सेवाएं और आपातकालीन विभाग की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। हालांकि डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है, बल्कि अपने सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समय पर कार्रवाई करता, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
डॉक्टरों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रशासन ने अब तक इस घटना को लेकर कोई ठोस बयान या कार्रवाई नहीं की है। इससे स्वास्थ्य कर्मियों में असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई है। पटना एम्स में डॉक्टरों की यह हड़ताल केवल एक घटना के खिलाफ विरोध नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र में सुरक्षा की अनदेखी के विरुद्ध एक चेतावनी है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि वे मरीजों की सेवा के लिए समर्पित हैं, लेकिन अपने आत्मसम्मान और जीवन को खतरे में डालकर काम नहीं कर सकते। अब यह जिम्मेदारी प्रशासन की है कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए और अस्पताल परिसर को सुरक्षित बनाए।

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