पटना में बढ़ते अपराध पर तेजस्वी का हमला, कहा- राज्य में हो रही सैकड़ो हत्याएं, निष्क्रिय हुए सीएम
पटना। राजधानी पटना में आपराधिक घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालिया घटना में जकरियापुर इलाके में एक व्यवसायी की सरेशाम गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे न सिर्फ आमजन में भय का माहौल है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मच गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे राज्य सरकार की विफलता करार देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कठघरे में खड़ा किया है। 11 जुलाई की रात लगभग 11 बजे रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र के जकरियापुर इलाके में तृष्णा मार्ट के मालिक विक्रम झा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाइक सवार दो अज्ञात हमलावरों ने विक्रम झा को निशाना बनाया और ताबड़तोड़ फायरिंग की। गोली लगने से घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गए। विक्रम झा मूल रूप से दरभंगा के रहने वाले थे और पटना में किराना व्यवसाय से जुड़े थे।
पुलिस की जांच और प्रारंभिक अनुमान
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और घटनास्थल से सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हत्या के पीछे पुरानी रंजिश, व्यापारिक विवाद, लेन-देन का झगड़ा या गैंगवार जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है, जिससे हमलावरों की पहचान हो सके। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
तेजस्वी यादव का तीखा हमला
इस घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “पटना में और व्यवसायी विक्रम झा की गोली मारकर हत्या! डीके टैक्स और तबादला उद्योग प्रदेश की अराजक स्थिति का मुख्य कारण। अचेत मुख्यमंत्री क्यों मौन हैं? प्रतिदिन हो रही सैंकड़ों हत्याओं का दोषी कौन?” उन्होंने सत्तारूढ़ दल को “भ्रष्ट भूंजा पार्टी” कहकर भी संबोधित किया और जवाब मांगा।
जनता में भय और नाराजगी
स्थानीय नागरिकों में घटना को लेकर काफी नाराजगी है। एक तरफ शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार खराब हो रही है, वहीं दूसरी ओर अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अब राजधानी में भी सुरक्षित रहना मुश्किल हो गया है। जिस तरह खुलेआम गोलीबारी की घटनाएं हो रही हैं, उससे साफ है कि पुलिस का डर अपराधियों पर खत्म हो गया है।
राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल
इस तरह की घटनाएं न सिर्फ प्रशासन की विफलता को उजागर करती हैं बल्कि राजनीतिक नेतृत्व की संवेदनहीनता पर भी सवाल खड़े करती हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्य सरकार अपराध नियंत्रण में पूरी तरह विफल हो चुकी है। तेजस्वी यादव जैसे नेता लगातार सरकार को घेर रहे हैं और जनता में इस बात को लेकर नाराजगी भी है कि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं होती। विक्रम झा की हत्या ने एक बार फिर बिहार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। जब राजधानी पटना में भी इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं, तो राज्य के अन्य हिस्सों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और सरकार जनता को सुरक्षा देने के अपने वादे को कितना निभा पाती है। विपक्ष की ओर से यह मुद्दा आगामी चुनावों में एक बड़ा सवाल बन सकता है।


