पटना में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 58 चार्जिंग स्टेशन बनेंगे, पेट्रोल पंप जैसी सुविधा मिलेगी
- शहरी और ग्रामीण इलाकों में जून से निर्माण की संभावना, प्रीपेड प्रणाली से होगी चार्जिंग
- कंकड़बाग से लेकर मोकामा तक विस्तार, 24 घंटे उपलब्ध रहेगी सुविधा
पटना। जिले में तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने बड़ी पहल की है। अब वाहन चालकों को बैटरी चार्ज करने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। नगर निगम और जिला परिवहन कार्यालय की संयुक्त योजना के तहत जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल पंप की तर्ज पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए कुल 58 स्थानों को चिह्नित किया गया है, जहां जल्द ही चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस योजना के तहत नगर निगम द्वारा आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है, जबकि जिला परिवहन कार्यालय निर्माण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है। अधिकारियों के अनुसार, इन चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण कार्य की शुरुआत जून महीने से होने की संभावना है। प्रत्येक स्टेशन पर दो से तीन चार्जिंग बॉक्स लगाए जाएंगे, ताकि एक साथ कई वाहन चार्ज हो सकें। चार्जिंग की सुविधा प्रीपेड प्रणाली पर आधारित होगी, जिससे उपभोक्ता पहले भुगतान कर वाहन को चार्ज कर सकेंगे। यह व्यवस्था पारदर्शी और सुविधाजनक मानी जा रही है। इसके अलावा, इन स्टेशनों पर विभिन्न प्रकार के वाहनों के लिए अलग-अलग स्तर की चार्जिंग सुविधा उपलब्ध होगी। इसमें धीमी गति से लेकर तेज गति तक चार्ज करने की व्यवस्था शामिल होगी। मुख्य रूप से 120 वोल्ट और 240 वोल्ट क्षमता वाले वाहनों को चार्ज करने की सुविधा दी जाएगी। पटना में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इसमें दोपहिया, तिपहिया, बस और कार जैसे विभिन्न प्रकार के वाहन शामिल हैं। हालांकि, चार्जिंग स्टेशन की कमी के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अधिकांश वाहन मालिक अपने घरों में ही गाड़ियों को चार्ज करते हैं, लेकिन यात्रा के दौरान बैटरी खत्म हो जाने पर उन्हें बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नई योजना के लागू होने से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना शहर के प्रमुख इलाकों में की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके। पटना के कंकड़बाग, दानापुर, सगुना मोड़, बोरिंग रोड, शिवपुरी और चितकोहरा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में ये स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके अलावा, जिले के बाहरी इलाकों जैसे बाढ़, बख्तियारपुर, मोकामा और दुल्हिनबाजार में भी चार्जिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन स्टेशनों को सार्वजनिक स्थानों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे स्थापित किया जाएगा, ताकि यात्रियों को भी सुविधा मिल सके। सभी चार्जिंग स्टेशन चौबीसों घंटे खुले रहेंगे, जिससे किसी भी समय वाहन चार्ज करना संभव होगा। इस परियोजना को विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से लागू किया जाएगा, जो इन स्टेशनों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएंगी। वर्तमान स्थिति की बात करें तो पूरे पटना जिले में अभी केवल पांच से छह चार्जिंग स्टेशन ही उपलब्ध हैं, जो बढ़ती मांग के मुकाबले बेहद कम हैं। ऐसे में 58 नए स्टेशनों की स्थापना से न केवल इस कमी को दूर किया जा सकेगा, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और शहर का पर्यावरण बेहतर होगा। साथ ही, लोगों को ईंधन पर होने वाले खर्च से भी राहत मिलेगी। पटना में प्रस्तावित यह चार्जिंग स्टेशन परियोजना न केवल तकनीकी सुविधा का विस्तार है, बल्कि यह शहर को हरित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है। आने वाले समय में इसका लाभ बड़ी संख्या में वाहन चालकों को मिलेगा और यह पहल राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।


