लॉक डाउन-2 : जान की सुरक्षा के साथ-साथ जहान के लिए कवायद शुरू
पटना। कोरोना संकट को लेकर देश में जारी लॉक डाउन के बीच अब जान की सुरक्षा के साथ-साथ जहान के लिए भी कवायद शुरू हो गई है। देश में विस्तारित दूसरे चरण का लॉक डाउन बुधवार से शुरू हो गया है। इस चरण में देश के प्रधानमंत्री ने जान के साथ जहान भी का मूल मंत्र दिया है। इस दिशा में लोगों का पेट भरने वाले अन्नदाता किसानों ने प्रधानमंत्री की इच्छा और उनके विश्वास को सार्थक करने के लिए फिर से खेत से अपना नाता जोड़ लिया है। संकट के इस दौर में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए इसे अहम प्रयास माना जा सकता है।
वैसे तो प्रधानमंत्री किसान निधि योजना के तहत केंद्र सरकार किसानों के खाते में सीधे 2000 रूपये भेज कर उनकी परेशानी को दूर करने की कोशिश कर रही है लेकिन किसानों को खुद के अलावा देश की भी फिक्र है ताकि वह सरकार को भी संकट की इस घड़ी में मदद कर सकें। इसी परिप्रेक्ष्य में बिहार के किसानों ने स्वावलंबन की भावना का परिचय देते हुए अपना कृषि कार्य शुरू कर दिया है। वैसे दूसरे चरण के लॉक डाउन के दौरान केंद्र सरकार ने आज कुछ ढील रूपी रियायतों की घोषणा की है जिसमें कृषि कार्य भी शामिल है। इस अवसर का लाभ उठाने को किसान तैयार हैं। अभी खेतों में गेहूं की फसल लगी हुई है। यह पक कर तैयार है। जब कटनी का समय आया तो कोरोना संक्रमण की वजह से कटनी का कार्य रुक गया। ऐसे में उम्मीद से लबरेज किसानों के लिए यह संकट दोहरी मार से कम नहीं थी। उनका तो निजी नुकसान होता ही साथ ही यह राष्ट्रीय नुकसान भी हो सकता था। बावजूद इसके उदास किसानों ने उम्मीद नहीं छोड़ी। ऐसी परिस्थिति में खेतों में गेहूं के कटनी करते हुए किसान कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी सामाजिक दूरी बनाने के जरूरी निर्देश का पालन कर रहे।
नहीं हो रही लॉक डाउन से परेशानी
पटना जिले का नौजवान किसान अजय कुमार खेतों में जाने की सरकार से मिली इजाजत से काफी खुश और उत्साहित हैं। इस बार इनके खेत में गेहूं की अच्छी फसल हुई है। अपने तीन अन्य सहयोगी किसानों के साथ वे सवेरे गेहूं की कटाई के लिए खेत पहुंच। पूरी तन्मयता और रफ्तार से ये लोग गेहूं की कटाई कर रहे हैं। अजय बताते हैं कि इस बार फसल ठीक-ठाक हुआ है। लॉक डाउन को सही बताते हुए इनका कहना है कि इस वजह से खेती कार्य में इन्हें किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हो रही है। हां खास बात यह है कि खेत में काम करते वक्त भी इनके द्वारा सामाजिक दूरी बनाया जा रहा है ताकि कोरोना संक्रमण की कोई संभावना नहीं बने ।
जान है तो जहान है


बिहार के भागलपुर जिले में भी इस बार गेहूं की अच्छी पैदावार हुई है। खेतों में गेहूं की पकी बालियों ने यहां के किसानों को इस बार काफी उत्साहित किया है। अब कटनी की इजाजत मिली तो स्वाभाविक है कि किसानों का उत्साह दोगुना हो गया है और जब उत्साह दोगुना हो तो कोरोना से जंग में जज्बात मजबूत होगा ही। इसी जज्बे के साथ यहां के किसान इस संघर्ष में सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए उसे यह भरोसा दिला रहे हैं कि लोगों के जीवन यापन के लिए उनके अन्न के भंडार को भी लोग भरेंगे। जिले के बाबूपुर गांव के रहने वाले किसान सुशील कुमार मंडल इसी भावना और उत्साह के साथ खेत में अपना पसीना बहाकर अपनी जिम्मेवारी निभा रहे हैं।
देश की सेवा के लिए काट रहे हैं गेहूं
सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर प्रखंड के माधवपुर गांव के रहने वाले किसान मोहम्मद अंसारी अपने खेत में गेहूं की कटाई करते हुए कहते हैं कि देश सेवा के लिए उत्साहपूर्वक काम कर रहे हैं। जाहिर सी बात है कि उनकी सोच इस संकट में किसी को भूखा नहीं रहने देने से जुड़ी हुई है। खेत में अपने सहयोगियों के साथ दूरी बनाकर वे गेहूं की कटाई कर रहे हैं। कटी हुई बाली की थ्रेसिंग और उसे बोरिया में पैकिंग करने में उनकी तत्परता यही दर्शाती है कि अनाज जल्द से जल्द मंडी में जाए ताकि आज की स्थिति में लोगों को खाद्यान्न की किल्लत का सामना नहीं करना पड़े। मो. अंसारी बताते हैं कि उन्हें लॉक डाउन के दौरान किसी भी स्तर पर कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
साभार : पीआईबी

