गंगा किनारे अवैध कब्जों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, कंगनघाट से दानापुर तक चलेगा अतिक्रमण हटाओ अभियान
- सरकारी जमीन पर किसी दावेदारी को नहीं मिलेगी मान्यता, भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश
- गंगा तट पर प्रस्तावित विकास योजनाओं और बाढ़ सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने तेज की कार्रवाई
पटना। गंगा किनारे बढ़ते अवैध कब्जों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। कंगनघाट से लेकर दानापुर तक गंगा तट की असर्वेक्षित सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन का कहना है कि गंगा किनारे की सरकारी भूमि पर किसी भी व्यक्ति या समूह की दावेदारी स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रशासन ने संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि अवैध कब्जों को तत्काल चिन्हित कर हटाने की कार्रवाई तेज की जाए। पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने बताया कि पिछले कई वर्षों में गंगा नदी की धारा उत्तर दिशा की ओर खिसकती गई है। इसके कारण दक्षिणी किनारे पर बड़ी मात्रा में नई जमीन उभरकर सामने आई। समय के साथ इस जमीन पर धीरे-धीरे अवैध कब्जे होने लगे। कई लोगों ने यहां झोपड़ियां, मकान, गोदाम और अन्य स्थायी निर्माण खड़े कर लिए। इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने इन जमीनों पर निजी स्वामित्व का दावा भी करना शुरू कर दिया। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह पूरी जमीन असर्वेक्षित सरकारी भूमि है और इस पर किसी भी प्रकार का निजी अधिकार मान्य नहीं होगा। जिलाधिकारी ने कहा कि गंगा किनारे के इन क्षेत्रों में सरकार की कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें सड़क निर्माण, तटबंध परियोजनाएं, पर्यटन विकास और सार्वजनिक उपयोग की अन्य योजनाएं शामिल हैं। ऐसे में अवैध कब्जे इन योजनाओं के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन रहे हैं। जिला प्रशासन के अनुसार पिछले पंद्रह दिनों से विशेष टीम लगातार अभियान चला रही है। इस दौरान कई जगहों पर बने अस्थायी और स्थायी ढांचों को तोड़ा गया है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज होगी। इसके लिए क्षेत्रवार जिम्मेदारी तय कर दी गई है ताकि हर इलाके में लगातार निगरानी रखी जा सके। पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ाई जा रही है ताकि अतिक्रमण हटाने के दौरान किसी प्रकार की कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल सरकारी जमीन खाली कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने कहा कि मानसून और बाढ़ के समय गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। जिन इलाकों में लोग अभी अवैध रूप से रह रहे हैं, वहां बाढ़ का गंभीर खतरा बना रहता है। ऐसे में जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी यह अभियान जरूरी हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि गंगा किनारे बसे कई इलाकों में हर वर्ष जलभराव और कटाव की समस्या उत्पन्न होती है। इसके बावजूद भूमाफियाओं ने लोगों को बहला-फुसलाकर सरकारी जमीन पर बसाना शुरू कर दिया। प्रशासन का आरोप है कि कुछ संगठित समूहों ने इस जमीन की अवैध खरीद-बिक्री तक शुरू कर दी थी। अब ऐसे मामलों की भी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद भूमाफियाओं और अवैध कब्जाधारकों में हड़कंप मच गया है। कई इलाकों में लोगों ने स्वयं ही अपने निर्माण हटाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर विरोध की स्थिति भी देखने को मिल रही है। प्रशासन ने साफ कहा है कि किसी भी दबाव या विरोध के बावजूद सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि गंगा तट को अतिक्रमण मुक्त बनाने से न केवल सरकारी परियोजनाओं को गति मिलेगी बल्कि शहर के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास में भी मदद मिलेगी। भविष्य में गंगा किनारे आधुनिक सड़क, हरित क्षेत्र और पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। ऐसे में प्रशासन चाहता है कि सरकारी जमीन पूरी तरह खाली कराई जाए ताकि योजनाओं को बिना बाधा लागू किया जा सके। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अभियान पूरी पारदर्शिता और सख्ती के साथ चलाया जाए। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि वे सरकारी जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण न करें और अफवाहों से बचें। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में गंगा किनारे और बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई देखने को मिल सकती है।


