केरल में कांग्रेस सरकार की वापसी, वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की ली शपथ

  • 60 वर्षों बाद पूरी मंत्रिपरिषद ने एक साथ ली शपथ, राहुल-प्रियंका रहे मौजूद
  • नई सरकार में 14 विधायक पहली बार बने मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष चुनाव 22 मई को

तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने गुरुवार को केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता संभाल ली। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद अर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री के साथ उनकी मंत्रिपरिषद के 20 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की। राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित भव्य समारोह में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी समारोह में शामिल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और भारतीय जनता पार्टी नेता राजीव चंद्रशेखर की मौजूदगी ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा पैदा की। हालांकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर विदेश दौरे पर होने के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने शपथ ग्रहण के बाद कहा कि केरल के इतिहास में लगभग 60 वर्षों बाद ऐसा अवसर आया है, जब पूरी मंत्रिपरिषद ने एक साथ शपथ ली है। उन्होंने कहा कि इससे पहले 1962 में तत्कालीन मुख्यमंत्री आर शंकर ने अपनी पूरी कैबिनेट के साथ शपथ ली थी, लेकिन उनकी सरकार 1964 में अविश्वास प्रस्ताव के कारण गिर गई थी। शपथ ग्रहण से पहले सतीशन ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का हाथ पकड़कर जनता के सामने कांग्रेस की जीत का संदेश दिया। शपथ लेने के बाद जब वे राहुल गांधी से मिले तो राहुल ने उन्हें गले लगाकर बधाई दी और कुछ देर तक उनसे बातचीत भी की। इसके बाद सतीशन ने खड़गे, सिद्धारमैया, रेवंत रेड्डी, पिनराई विजयन, डीके शिवकुमार और अन्य नेताओं से मुलाकात की। नई सरकार की सबसे खास बात यह है कि मंत्रिमंडल में 14 विधायक पहली बार मंत्री बने हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस ने अनुभवी नेताओं के साथ नए चेहरों को भी मौका देने की रणनीति अपनाई है। पहली बार मंत्री बनने वालों में सीपी जॉन, एन शमसुद्दीन, केएम शाजी, पीके बशीर, वीई अब्दुल गफूर, पीसी विष्णुनाथ, रोजी एम जॉन, बिंदु कृष्णा, टी सिद्दीकी, केए थुलसी और ओजे जनीश जैसे नाम शामिल हैं। कांग्रेस ने इस बार विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद अपने पास रखे हैं। वरिष्ठ नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि शनिमोल उस्मान को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विधानसभा अध्यक्ष का औपचारिक चुनाव 22 मई को होगा। इसके बाद राज्यपाल का नीतिगत संबोधन 29 मई को प्रस्तावित है और माना जा रहा है कि राज्य का बजट 5 जून तक पेश किया जाएगा। नई सरकार में कई अनुभवी नेताओं को भी जगह मिली है। कांग्रेस नेता मॉन्स जोसेफ ने मंत्री पद की शपथ ली। वे पेशे से वकील हैं और पहले भी मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा आरएसपी नेता शिबू बेबी जॉन, अनूप जैकब और सीपीएम नेता सीपी जॉन ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में कांग्रेस की यह जीत पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय बाद कांग्रेस ने राज्य में मजबूत वापसी करते हुए सत्ता हासिल की है। पार्टी अब इस सरकार के माध्यम से विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरे परिसर में उत्साह और जश्न का माहौल देखने को मिला। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नए मुख्यमंत्री और मंत्रियों का स्वागत नारेबाजी और फूलों की वर्षा के साथ किया। वहीं आम लोगों में भी नई सरकार से काफी उम्मीदें दिखाई दीं। अब सबकी नजरें नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक और आगामी बजट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सरकार अपने शुरुआती फैसलों के जरिए जनता को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश करेगी। केरल की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में राज्य के विकास और राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।

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