बिहार के सरकारी अस्पतालों में बढ़ेगी जवाबदेही, डॉक्टरों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य

  • निजी प्रैक्टिस पर रोक के बाद स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की नई निगरानी व्यवस्था
  • मरीजों को बेहतर इलाज और पारदर्शिता के लिए डिजिटलीकरण पर जोर, डॉक्टरों ने रखीं 19 मांगें

पटना। बिहार के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने और डॉक्टरों की जवाबदेही तय करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब सभी सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को निर्धारित ड्यूटी रोस्टर के अनुसार उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही सभी चिकित्सकों और कर्मियों को बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। राज्य सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से अस्पतालों में अनुशासन बढ़ेगा और मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले महीने 11 अप्रैल को सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने का फैसला लिया था। इसके बाद अब सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों की निगरानी अब डिजिटल प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। डॉक्टरों को मरीजों को अनावश्यक रूप से अन्य अस्पतालों में रेफर करने की आदत छोड़नी होगी। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि मरीजों के इलाज में मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा अस्पतालों में उपलब्ध जांच सुविधाओं का लाभ मरीजों को वहीं पर उपलब्ध कराया जाएगा ताकि उन्हें बाहर भटकना न पड़े। नई सरकार के गठन और प्रशासनिक फेरबदल के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में कई लक्ष्य निर्धारित किए हैं। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था को मजबूत करने और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके तहत मरीजों के इलाज से जुड़ी सभी जानकारियों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने की तैयारी की जा रही है। विभाग का मानना है कि इससे इलाज की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। साथ ही मरीजों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहने से इलाज में सुविधा होगी। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अस्पतालों में किसी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अस्पतालों की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी की जाए और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी क्रम में विभाग ने रात्रि पाली में कार्यरत चिकित्सकों के लिए भी सख्ती शुरू कर दी है। अब रात्रि ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों को सुबह अपनी उपस्थिति अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी। यह व्यवस्था पिछले महीने से लागू कर दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वरिष्ठ चिकित्सक आपातकालीन मरीजों की समुचित देखभाल करें और रात्रि ड्यूटी के दौरान अस्पताल छोड़कर न जाएं। हालांकि सरकार के इन फैसलों के बीच सरकारी डॉक्टरों ने भी अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर आवाज उठाई है। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ की आम सभा और महासम्मेलन रविवार को पटना स्थित भारतीय चिकित्सा संघ भवन में आयोजित किया गया। इस दौरान राज्यभर से आए चिकित्सकों ने सरकार से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं पर विचार करने की मांग की। महासम्मेलन के बाद चिकित्सकों ने अपनी 19 सूत्री मांगों के समर्थन में भारतीय चिकित्सा संघ भवन से जेपी गोलंबर तक पैदल मार्च भी निकाला। डॉक्टरों ने कहा कि निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने से पहले सरकार को चिकित्सकों के साथ चर्चा करनी चाहिए थी। चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों के लिए आवास और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था, प्रशासनिक पदों पर कार्यरत चिकित्सा पदाधिकारियों को वाहन सुविधा उपलब्ध कराना और अस्पतालों में सशस्त्र सुरक्षा गार्ड की तैनाती शामिल है। इसके अलावा बिहार चिकित्सा सेवा संस्थान एवं व्यक्ति सुरक्षा कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग भी उठाई गई। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के प्रवक्ता डॉ. विनय कुमार ने कहा कि राज्यभर से आए चिकित्सकों ने सरकार से उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक कार्य वातावरण भी मिलना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की नई व्यवस्था को राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटलीकरण और निगरानी प्रणाली से अस्पतालों की व्यवस्था में कितना सुधार आता है और मरीजों को इसका कितना लाभ मिल पाता है।

You may have missed