अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मुहर, युद्धविराम के साथ खुला होर्मुज मार्ग
- युद्ध समाप्ति के अंतरिम समझौते पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने किए हस्ताक्षर, वैश्विक बाजारों में राहत
- तेल आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, समझौते की शर्तों पर राजनीतिक बहस तेज
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दोनों देशों ने युद्धविराम संबंधी अंतरिम समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। समझौते के लागू होते ही युद्ध समाप्त करने, होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने तथा समुद्री नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया में शांति स्थापना की दिशा में एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
वर्साय महल में हुआ समझौता
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की उपस्थिति में पेरिस के निकट स्थित ऐतिहासिक वर्साय महल में समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस दस्तावेज़ को स्वीकृति प्रदान की। भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह समझौते की घोषणा होते ही इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया।
समझौते के प्रमुख बिंदु
समझौते के तहत ईरान में युद्ध समाप्त करने, लेबनान में संघर्ष रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने तथा अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर सहमति बनी है। अंतरराष्ट्रीय समाचार माध्यमों में प्रकाशित मसौदे के अनुसार तेल निर्यात को सामान्य बनाने, कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने और जमे हुए वित्तीय संसाधनों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने सहित कुल 14 बिंदुओं पर सहमति बनने का दावा किया गया है। ट्रम्प ने समझौते को अमेरिका की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि उनका लक्ष्य युद्ध समाप्त करना, होर्मुज मार्ग को खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था, जो अब पूरा हो गया है। हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि ईरान समझौते का उल्लंघन करता है तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
चीन और अन्य देशों की प्रतिक्रिया
चीन ने इस समझौते का स्वागत करते हुए दोनों पक्षों से युद्धविराम का सम्मान करने की अपील की है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को समझौते का पूरी तरह पालन करना चाहिए। चीन ने ईरान और लेबनान को मानवीय सहायता देने की भी घोषणा की है। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि समझौता लागू हो चुका है और इसके पहले चरण के तहत होर्मुज मार्ग को तत्काल खोलने तथा अमेरिकी नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान और कतर स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे, जहां समझौते से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होगी।
समझौते पर उठे सवाल
हालांकि समझौते को लेकर सभी पक्ष एकमत नहीं हैं। ईरान के कुछ नेताओं ने अमेरिका की प्रतिबद्धता पर संदेह जताया है। ईरानी सांसद मालेक शरियती ने कहा कि केवल हस्ताक्षर हो जाने से किसी समझौते की गारंटी नहीं मिलती। उनका कहना है कि अमेरिका के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए सावधानी बरतना आवश्यक है। अमेरिका में भी विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने समझौते की आलोचना की है। सीनेट में विपक्ष के नेता चक शूमर ने इसे अमेरिकी राजनीति की बड़ी भूलों में से एक बताया। अन्य डेमोक्रेट सांसदों ने भी आशंका जताई कि समझौते में ईरान को अधिक रियायतें दी गई हैं जबकि अमेरिका को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है।
तेल बाजार को मिली राहत
समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तुरंत प्रभाव दिखाई दिया। वैश्विक मानक कच्चा तेल घटकर लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल भी नीचे आया। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने और तेल आपूर्ति सामान्य होने की संभावना से बाजार में राहत का माहौल बना है।
वर्साय महल का ऐतिहासिक महत्व
जिस वर्साय महल में यह समझौता संपन्न हुआ, उसका विश्व इतिहास में विशेष स्थान है। सत्रहवीं शताब्दी में विकसित यह महल कभी फ्रांस की राजनीतिक सत्ता का केंद्र था। प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1919 में प्रसिद्ध वर्साय संधि पर भी यहीं हस्ताक्षर किए गए थे। लगभग 2,300 कमरों वाले इस महल को आज विश्व धरोहर स्थल के रूप में जाना जाता है और यह फ्रांस के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल है।
पश्चिम एशिया में नई शुरुआत की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष समझौते की शर्तों का ईमानदारी से पालन करते हैं तो इससे पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ेगी और वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी राहत मिलेगी। हालांकि समझौते के आलोचक अब भी इसकी दीर्घकालिक सफलता को लेकर आशंकित हैं। ऐसे में आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि यह समझौता स्थायी शांति की नींव बनता है या केवल अस्थायी विराम साबित होता है।


