बिहार में पेट्रोल की भारी किल्लत, किशनगंज में चार पेट्रोल पंप बंद, लोग बंगाल जाने को मजबूर
- अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच तेल कंपनियों ने बढ़ाए ईंधन के दाम, कई जिलों में अफरा-तफरी
- परिवहन, खेती और रोजमर्रा की वस्तुओं पर बढ़ेगा महंगाई का असर
पटना। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। नई दरें 15 मई से लागू कर दी गई हैं। कीमतों में बढ़ोतरी के बाद बिहार सहित देश के कई हिस्सों में लोगों की परेशानी बढ़ गई है। राजधानी पटना में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 108.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि गुरुवार तक इसकी कीमत 105.37 रुपये थी। वहीं डीजल अब 94.65 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जो पहले 91.65 रुपये प्रति लीटर था। इसके अलावा प्रमुख शहरों में संपीड़ित प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी दो रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी की गई है। ईंधन की कीमतें बढ़ने के बाद बिहार के कई जिलों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। गया जिले के इमामगंज नगर पंचायत स्थित पेट्रोल पंप पर शुक्रवार सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहिया और चारपहिया वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा। लोगों में यह आशंका थी कि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं, इसलिए बड़ी संख्या में लोग ईंधन भरवाने पहुंचे। किशनगंज जिले में स्थिति और अधिक गंभीर दिखाई दी। ठाकुरगंज प्रखंड के आठ पेट्रोल पंपों में से चार को बंद कर दिया गया है। इसके कारण लोग पश्चिम बंगाल जाकर अपने वाहनों में पेट्रोल और डीजल भरवा रहे हैं। जिले में पेट्रोल की कीमत 110.26 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल 96.34 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। नालंदा जिले के परिवहन कारोबारियों ने भी बढ़े हुए दामों पर चिंता जताई है। एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी ने कहा कि दाम बढ़ने की आशंका तो पहले से थी, लेकिन एक साथ तीन रुपये की बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं थी। उनका कहना है कि इसका सीधा असर परिवहन खर्च पर पड़ेगा, जिससे सामान ढुलाई महंगी हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई पर व्यापक असर पड़ेगा। ट्रक और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ सकता है, जिसके कारण दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन की कीमतों में वृद्धि होगी। किसानों पर भी इसका असर पड़ेगा क्योंकि ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए अधिक खर्च करना पड़ेगा। इससे खेती की लागत बढ़ेगी और अनाज महंगा हो सकता है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन, स्कूल बसों और अन्य यात्री वाहनों के किराए में भी वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। जानकारों के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में तेजी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण उन्हें कीमतों में वृद्धि करनी पड़ी है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल और महंगे हो सकते हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने भी देशवासियों से पेट्रोलियम उत्पादों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है। तेलंगाना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग संयम के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयातित पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग केवल आवश्यकता के अनुसार करने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और युद्ध के प्रतिकूल प्रभावों को भी कम किया जा सकेगा। बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों को अब उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य हों, ताकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सके।


