August 12, 2026

बिहार के युवाओं के लिए विदेश में नौकरी का रास्ता होगा आसान, ‘स्किल इंडिया इंटरनेशनल’ केंद्र खोलने की तैयारी

  • वैश्विक रोजगार के लिए युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर सुरक्षित नियुक्ति तक मिलेगी मदद, अनधिकृत एजेंटों से मिलेगी राहत
  • पंजीकृत कामगारों के बच्चों के लिए पटना में बनेगा आवासीय विद्यालय, एक जिले में 500 बच्चों को मिलेंगी नि:शुल्क सुविधाएं

पटना। विदेश में नौकरी करने और बेहतर रोजगार की तलाश रखने वाले बिहार के युवाओं के लिए राज्य सरकार नई पहल करने जा रही है। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘स्किल इंडिया इंटरनेशनल’ केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह केंद्र भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से विदेश जाने के इच्छुक युवाओं को रोजगार की तलाश, कौशल प्रशिक्षण और सुरक्षित नियुक्ति से जुड़ी सुविधाएं एक ही व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराने की योजना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य बिहार के युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। इसके तहत बिहार राज्य विदेश रोजगार नियुक्ति ब्यूरो के माध्यम से युवाओं को विभिन्न देशों में रोजगार दिलाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाएगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि विदेश जाने वाले युवाओं को पारदर्शी और सुरक्षित माध्यम से नौकरी मिले तथा उन्हें अनधिकृत एजेंटों के चंगुल में न फंसना पड़े।
खाड़ी देशों से यूरोप तक रोजगार के अवसर
प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से खाड़ी सहयोग परिषद के देशों, यूरोप, पूर्वी एशिया और दुनिया के अन्य प्रमुख रोजगार बाजारों में बिहार के युवाओं के लिए नियुक्ति के अवसर तलाशे जाएंगे। सरकार की योजना के अनुसार पूरी प्रक्रिया नैतिक, पारदर्शी और निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जाएगी। विदेश में नौकरी की तलाश करने वाले युवाओं के सामने अक्सर सही एजेंसी चुनने, रोजगार की वास्तविकता जानने और संबंधित देश के नियमों को समझने जैसी चुनौतियां रहती हैं। नई व्यवस्था में इन समस्याओं को दूर करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। युवाओं को रोजगार से पहले आवश्यक जानकारी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे विदेश जाकर किसी तरह की परेशानी में न पड़ें।
शारीरिक श्रम से लेकर विशेषज्ञ नौकरियों तक
‘स्किल इंडिया इंटरनेशनल’ केंद्र में अलग-अलग स्तर के रोजगार के लिए युवाओं को तैयार किया जाएगा। इसमें शारीरिक श्रम और तकनीकी कौशल से जुड़े रोजगार के साथ प्रशासनिक एवं बौद्धिक कार्यों के अवसर भी शामिल होंगे। तकनीकी और शारीरिक कार्यों में रुचि रखने वाले युवाओं को संबंधित क्षेत्र के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं कार्यालयी, प्रशासनिक और विशेषज्ञता आधारित कार्यों के लिए आवश्यक योग्यता और दक्षता विकसित करने की व्यवस्था होगी। इस तरह केंद्र का लक्ष्य केवल विदेश भेजना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करना भी होगा।
विदेश जाने से पहले मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
केंद्र में प्रस्थान पूर्व अभिमुखीकरण प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके तहत विदेश जाने वाले युवाओं को संबंधित देश के कानून, नियम और रोजगार व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। उन्हें प्रवासी श्रमिकों के अधिकार, स्थानीय संस्कृति और कार्यस्थल पर अपनाए जाने वाले व्यवहार के बारे में भी प्रशिक्षित किया जाएगा। युवाओं को यह भी बताया जाएगा कि विदेश में किसी समस्या की स्थिति में वे किससे संपर्क कर सकते हैं और उन्हें उपलब्ध सरकारी सहायता किस प्रकार मिल सकती है। इसके अलावा संबंधित देशों में काम करने के लिए जरूरी विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
डिजिटल आंकड़े और सुरक्षा पर भी जोर
सरकार विदेश जाने वाले बिहार के श्रमिकों का डिजिटल आंकड़ा तैयार करने की योजना पर भी काम कर रही है। इससे राज्य के पास विदेशों में कार्यरत श्रमिकों से संबंधित व्यवस्थित जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। जरूरत पड़ने पर सरकार उनके हितों से जुड़े मामलों में बेहतर तरीके से हस्तक्षेप कर सकेगी। केंद्र के माध्यम से चिकित्सकीय अनुमोदन, बीमा और अन्य सुरक्षा उपायों की व्यवस्था भी किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य विदेश जाने वाले श्रमिकों को रोजगार के साथ सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
पंजीकृत कामगारों के बच्चों के लिए पटना में आवासीय विद्यालय
विदेशी रोजगार की पहल के साथ श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग पंजीकृत कामगारों के बच्चों की शिक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण योजना तैयार कर रहा है। विभाग पटना में एक आवासीय विद्यालय खोलने की तैयारी कर रहा है। कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत 45 लाख से अधिक कामगारों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत राजधानी पटना से होगी। भविष्य में इसे राज्य के अन्य जिलों तक विस्तार देने की योजना है।
एक जिले में 500 बच्चों के रहने-खाने की सुविधा
प्रस्तावित आवासीय विद्यालय में पंजीकृत कामगारों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। एक जिले में कम से कम 500 बच्चों के रहने, खाने-पीने और पढ़ाई की व्यवस्था करने की योजना है। विद्यालय का संचालन किसी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था या समूह को सौंपे जाने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि कामगार परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने से उनके भविष्य के अवसर बेहतर होंगे। खासकर ऐसे परिवार, जिनकी आर्थिक स्थिति सीमित है, उनके बच्चों को आवासीय सुविधा के साथ शिक्षा मिलने से पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी।
रोजगार और शिक्षा, दोनों मोर्चों पर पहल
बिहार सरकार की दोनों योजनाओं को युवाओं और कामगार परिवारों से जोड़कर देखा जा रहा है। एक ओर विदेश में रोजगार की तलाश करने वाले युवाओं को सुरक्षित और पारदर्शी नियुक्ति व्यवस्था उपलब्ध कराने की तैयारी है, तो दूसरी ओर पंजीकृत कामगारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए आवासीय विद्यालय की योजना बनाई जा रही है। यदि प्रस्तावित व्यवस्थाएं निर्धारित योजना के अनुसार लागू होती हैं, तो इससे बिहार के युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ प्रवासी कामगार परिवारों की अगली पीढ़ी को भी बेहतर शैक्षणिक आधार मिल सकता है। सरकार की कोशिश रोजगार, कौशल, सुरक्षा और शिक्षा को एक साथ जोड़कर कामगार परिवारों के सामाजिक-आर्थिक विकास का रास्ता तैयार करने की है।

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