बड़ा खुलासा: बिहार टेंडर घोटाले का ‘जापान कनेक्शन’, पटना के ‘गुमनाम दफ्तर’ से चल रहा था 50 करोड़ का सिंडिकेट!
पटना। बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले (ऋषु श्री मामले) में एक और सनसनीखेज नाम सामने आया है—विपुल वैभव। इनका नेटवर्क बिहार से लेकर जापान तक फैला हुआ था। जानिए कैसे अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा था करोड़ों का यह खेल:
गुमनाम दफ्तर, 50 करोड़ का टर्नओवर
विपुल वैभव की कंपनी ‘मेसर्स श्रीहरी कंस्ट्रक्शन एंड कंसलटेंसी’ का सालाना टर्नओवर ₹50 करोड़ से ज्यादा है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि पटना के पॉश इलाके पाटलिपुत्र कॉलोनी में स्थित इनके दफ्तर पर कोई बोर्ड या नाम तक नहीं था। सब कुछ बेहद गुप्त तरीके से चलाया जा रहा था।
सरकारी विभागों पर कब्जा
यह कंपनी मुख्य रूप से बिहार सरकार के नगर विकास विभाग, आवास विभाग और ‘बुडको’ (BUDCO) जैसे बड़े विभागों से इंफ्रास्ट्रक्चर के सैकड़ों करोड़ के प्रोजेक्ट्स के ठेके लेती थी।
जापान से सेटिंग, बिहार में टेंडर
विपुल वैभव की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। वे जापान जाकर वहां की बड़ी कंपनियों से संपर्क करते थे और उन्हें बिहार लाते थे। इसके बाद, टेंडर माफिया ऋषु श्री की मदद से प्रशासनिक सांठगांठ के जरिए इन कंपनियों को करोड़ों के टेंडर दिलवाए जाते थे।
अधिकारियों के साथ तगड़ी सेटिंग
इस सिंडिकेट का काम अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध टेंडर मैनेज करना और आसानी से बिल पास करवाना था। जांच एजेंसियों की रडार पर अब यह पूरा सिंडिकेट है और माना जा रहा है कि इस ‘गुमनाम दफ्तर’ से मिले दस्तावेजों के बाद कई बड़े रसूखदारों पर गाज गिर सकती है।


