बिहार विधानसभा में विश्वास मत पर घमासान, तेजस्वी यादव का सरकार पर तीखा हमला

  • ‘भाजपा ने नीतीश कुमार को खत्म किया’, स्थिरता पर उठाए सवाल
  • बहुमत साबित करने को तैयार सरकार, 201 विधायकों के समर्थन का दावा

पटना। बिहार विधानसभा में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के बहुमत को लेकर चर्चा जारी है। सदन में विश्वास मत पर बहस के दौरान विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन पर तीखा हमला बोला और कई गंभीर आरोप लगाए। तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राजनीतिक रूप से समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि पहले ही यह तय कर लिया गया होता कि मुख्यमंत्री भाजपा का होगा, तो इस विशेष सत्र की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। उन्होंने चुनावी नारे का जिक्र करते हुए कहा कि “2025 से 30 फिर से नीतीश” का नारा देने वाली पार्टी ने ही उन्हें समय से पहले राजनीतिक रूप से हाशिये पर पहुंचा दिया। विधानसभा में बहस के दौरान तेजस्वी यादव ने राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के विकास के लिए स्थिर सरकार जरूरी होती है, लेकिन बिहार में स्थिति इसके विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में पांच बार सरकार बदली गई, जो एक असामान्य स्थिति है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन पिछले दो दशकों से सत्ता में है, इसके बावजूद बार-बार सरकार बदलने की स्थिति क्यों बनती है, यह गंभीर सवाल है। तेजस्वी यादव ने सदन के अध्यक्ष पर भी टिप्पणी करते हुए उन्हें मूल रूप से भाजपा से जुड़ा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार में ऐसे कई नेता शामिल हैं, जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग-अलग दलों से रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पूर्व में लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और विजेंद्र प्रसाद यादव का भी अतीत राष्ट्रीय जनता दल से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार में मूल भाजपा के नेताओं की भूमिका कम नजर आ रही है, जिससे पार्टी के भीतर भी असंतोष की स्थिति हो सकती है। तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि अब केवल उनके परिवार पर ही परिवारवाद का आरोप नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि वर्तमान नेतृत्व में भी पारिवारिक राजनीति के उदाहरण सामने आ रहे हैं। हालांकि, अपने भाषण के अंत में उन्होंने यह भी कहा कि वे सम्राट चौधरी को समर्थन देने के लिए तैयार हैं, जिससे सदन में एक अलग तरह का राजनीतिक संकेत भी देखने को मिला। विधानसभा में बहस के बाद विश्वास मत पर मतदान होना है। सत्तारूढ़ पक्ष का दावा है कि उनके पास 201 विधायकों का समर्थन है और सरकार आसानी से बहुमत साबित कर लेगी। इस बीच सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस केवल बहुमत परीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत भी दे रही है। जहां एक ओर विपक्ष सरकार की स्थिरता और नेतृत्व पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल अपने बहुमत के दम पर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश में है। बिहार की राजनीति एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। विश्वास मत के परिणाम से न केवल सरकार की स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी इसका असर पड़ेगा।

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