तेजप्रताप का राहुल गांधी पर हमला, कहा- उनसे विपक्षी गठबंधन नहीं चलेगा, प्रियंका करें इंडिया गठबंधन का नेतृत्व
- इंडिया गठबंधन की क्षमता पर उठाए सवाल, कहा राहुल से नहीं संभलेगा नेतृत्व
- नीतीश कुमार के इस्तीफे पर भी दी प्रतिक्रिया, बिहार की राजनीति में बयान से बढ़ी हलचल
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के बस की बात नहीं है कि वे इंडिया गठबंधन का प्रभावी ढंग से नेतृत्व कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने प्रियंका गांधी को इस भूमिका के लिए अधिक सक्षम बताया। मंगलवार को दिए गए अपने बयान में तेजप्रताप यादव ने कहा कि प्रियंका गांधी में नेतृत्व करने की क्षमता है और वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरह मजबूत व्यक्तित्व रखती हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की आवश्यकता होती है, जो उन्हें प्रियंका गांधी में दिखाई देता है। इसके विपरीत उन्होंने राहुल गांधी के तौर-तरीकों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल यात्राएं निकालने या मोटरसाइकिल पर घूमने से राजनीति नहीं चलती। तेजप्रताप यादव ने राहुल गांधी के हालिया बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर कहा था कि वे समझौता करने को मजबूर हुए और दबाव में पद छोड़ा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तेज प्रताप ने कहा कि राहुल गांधी इस तरह के मुद्दों में उलझे रहते हैं और उन्हें वास्तविक राजनीतिक परिस्थितियों की समझ कम है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को अपनी पुरानी गतिविधियों जैसे खाना बनाना या अन्य शौक तक ही सीमित रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियां उचित नहीं हैं, क्योंकि वे दूसरे राज्य से आते हैं और यहां की परिस्थितियों से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। तेज प्रताप ने सवाल उठाया कि आखिर राहुल गांधी को बिहार की राजनीति में इतनी रुचि क्यों है और क्या वे यहां किसी पद की आकांक्षा रखते हैं। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप यादव के इस बयान से विपक्षी गठबंधन के भीतर मतभेद उजागर हो सकते हैं। इंडिया गठबंधन पहले ही विभिन्न दलों के बीच समन्वय की चुनौती का सामना कर रहा है, ऐसे में इस तरह के बयान उसके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। वहीं, तेज प्रताप यादव का राजनीतिक सफर भी विवादों और अलग रुख के कारण चर्चा में रहा है। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल से अलग होकर अपनी जनसत्ता दल के बैनर तले चुनाव लड़ा था। उन्होंने न केवल स्वयं चुनाव लड़ा, बल्कि अपने उम्मीदवार भी मैदान में उतारे। हालांकि उन्हें और उनके उम्मीदवारों को सफलता नहीं मिली। इस दौरान उन्होंने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव पर सीधे हमले तो नहीं किए, लेकिन उनके करीबी नेताओं को लेकर लगातार आलोचना करते रहे। पार्टी के भीतर इस तरह की आंतरिक खींचतान को भी चुनावी हार के प्रमुख कारणों में से एक माना गया। परिवार के स्तर पर भी उन्हें कुछ समर्थन मिलता रहा है। उनकी बहन रोहिणी आचार्य कई बार सामाजिक माध्यमों पर उनके पक्ष में बयान देती रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी और परिवार के भीतर अलग-अलग धाराएं मौजूद हैं। तेज प्रताप यादव के इस ताजा बयान ने न केवल कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर भी चर्चा छेड़ दी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का राजनीतिक समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ता है और क्या विपक्षी दल इस तरह के मतभेदों को सुलझा पाते हैं या नहीं।


