कार्यपालक अभियंता हरेन्द्र कुमार के चार ठिकानों पर विशेष निगरानी इकाई की छापेमारी
- आय से अधिक संपत्ति के मामले में 10 अगस्त को दर्ज हुआ मुकदमा, अगले ही दिन पटना, वैशाली और बांका में एक साथ तलाशी
- महावीर नगर के अपार्टमेंट, बेउर चौराहा स्थित छह मंजिला मकान और पैतृक परिसर के साथ बांका कार्यालय भी जांच के दायरे में
पटना/बांका। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए लघु जल संसाधन विभाग, बांका प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता हरेन्द्र कुमार के चार ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। विशेष निगरानी इकाई, पटना ने कार्यपालक अभियंता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। इस संबंध में कांड संख्या 23/2026 दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार मामला 10 अगस्त 2026 को दर्ज हुआ और इसके अगले ही दिन 11 अगस्त को अलग-अलग टीमों ने अधिकारी से जुड़े चार स्थानों पर एक साथ तलाशी शुरू कर दी। विशेष निगरानी इकाई की कार्रवाई का उद्देश्य कार्यपालक अभियंता की घोषित और वास्तविक संपत्ति के बीच अंतर की जांच करना है। तलाशी के दौरान अधिकारी की आय के स्रोत, बैंक खातों, जमीन और मकान से जुड़े कागजात, निवेश, वित्तीय लेन-देन तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अधिकारी ने अपनी वैध आय के मुकाबले कहीं अधिक संपत्ति तो अर्जित नहीं की है। जांच के दायरे में पटना स्थित दो ठिकाने शामिल हैं। पहला ठिकाना पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के महावीर नगर स्थित जनक नंदिनी अपार्टमेंट का फ्लैट संख्या 307 है। विशेष निगरानी इकाई की टीम यहां पहुंचकर संपत्ति और वित्तीय लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसके अलावा पटना के बेउर चौराहा स्थित छह मंजिला मकान पर भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस मकान से जुड़े जमीन के कागजात, निर्माण और संपत्ति संबंधी अभिलेखों सहित अन्य दस्तावेजों को जांच टीम खंगाल रही है। तीसरा ठिकाना वैशाली जिले के पातेपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सिमरवारा में स्थित परिसर है। यहां भी जांच अधिकारियों की टीम ने तलाशी शुरू की है। संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की जांच के साथ यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित संपत्तियां किसके नाम पर हैं और इनके अर्जन का स्रोत क्या रहा है। चौथा ठिकाना बांका में लघु जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता का सरकारी कार्यालय है। विशेष निगरानी इकाई की टीम कार्यालय में विभागीय दस्तावेजों और संबंधित अभिलेखों की जांच कर रही है। सरकारी कार्यालय को तलाशी के दायरे में शामिल किए जाने से विभागीय कार्यों और उनसे जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, तलाशी के दौरान अब तक कितनी नकदी, संपत्ति के कागजात या अन्य साक्ष्य बरामद हुए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी जांच एजेंसी की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी आमतौर पर संबंधित अधिकारी की वैध आय, उसके खर्च और उसके नाम या उससे जुड़े लोगों के नाम पर अर्जित चल-अचल संपत्ति का तुलनात्मक अध्ययन करती है। इसके लिए बैंक खातों, भूमि और भवन के दस्तावेज, निवेश, ऋण, खरीद-बिक्री और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर संपत्तियों के वास्तविक मूल्य और उनके अर्जन के समय अधिकारी की आय का भी आकलन किया जाता है। चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ तलाशी से स्पष्ट है कि विशेष निगरानी इकाई मामले की व्यापक जांच कर रही है। हालांकि, तलाशी पूरी होने और दस्तावेजों के विस्तृत परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच एजेंसी को क्या-क्या साक्ष्य मिले हैं और अधिकारी की संपत्ति में कितना अंतर पाया गया है। फिलहाल कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के रूप में जारी है। आगे की कार्रवाई तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी।


