शक्तिपीठ, मंदिरों और पूजा स्थानों पर हुआ संधि पूजा

पटना सिटी। नवरात्र के आठवें दिन महागौरी की पूजा-आराधना की गई। अधिकांश लोगों ने महाअष्टमी का व्रत रखा। अधिकांश परिवार के लोगों ने कुंवारी कन्याओं का पूजन भी किया। शक्तिपीठ स्थल श्री बड़ी पटनदेवी में महंत विजय शंकर गिरी, छोटी पटनदेवी में आचार्य अभिषेक अनंत द्विवेदी, श्री बड़ी देवी जी मारूफगंज में अंजन साहा, श्री बड़ी देवी जी महराजगंज आदि में रात में संधि पूजा हुआ। गुरुवार को हवनादि के साथ नवरात्र की पूर्णाहूति होगा। 19 अक्टूबर शुक्रवार को सुबह कलश का विसर्जन होगा। फिर उसी दोपहर से दुर्गा देवी की प्रतिमा का विसर्जन का दौर शुरू होगा, जो शनिवार की रात तक चलेगा।
दो प्रमुख देवी बहनों का होगा खोइच्छा मिलन, देखने को उमड़ती है भीड़
पटना सिटी। यहां के दो प्रमुख प्रतिमाएं श्री बड़ी देवी जी मारूफगंज और महराजगंज की है। पौराणिक मान्यता है कि मारूफगंज को बड़ी और महराजगंज मो छोटी बहन की मान्यता प्राप्त है। दोनों प्रतिमाओं का निर्माण एक ही मूर्तिकार के द्वारा किया जाता है। विजयादशमी को शाम में महराजगंज की बड़ी देवी जी विसर्जन को अपने स्थान से निकल पुरानी सिटीकोर्ट के कुछ पहले आकर खड़ी होती हैं। यहां वह अपनी बारी बहन मारूफगंज की बड़ी देवी जी के आने का इंतजार करती हैं। जैसे ही उनका आगमन होता है पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारा से गुंज उठता है। इसके बाद पुष्पवर्षा के साथ दोनों भगवती को माला पहनाया जाता है। खोइच्छा कि अदला-बदली होने के बाद महाआरती होती है। इस पल को देखने के लिए महिला-पुरुषों की भारी भीड़ उमड़ती है। पैर रखने की जगह तक नहीं होती है। महाआरती के बाद मारूफगंज की बड़ी देवी जी आगे और महराजगंज की बड़ी देवीजी (छोटी बहन) पीछे भद्र घाट को प्रस्थान करती हैं। इस दौरान पुलिस प्रशासन को भीड़ को संभालना खासा परेशानी भरा होता है।

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